लेप्रोसी खोज के लिए होम सर्च अभियान

Updated at : 03 Sep 2016 6:41 AM (IST)
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लेप्रोसी खोज के लिए होम सर्च अभियान

प्रत्येक घर के हर सदस्य की होगी जांच एलसीडीसी कार्यक्रम पांच सितंबर से बिहारशरीफ : नालंदा जिले को लेप्रोसी से निजात दिलाने व इसकी रोकथाम के उद्देश्य से हर गांव,कस्बों व टोलों के हर सदस्य के शारीरिक जांच की जायेगी. जांच के दौरान शरीर के किसी अंग किसी अंग में उभरे दाग व उसमें सुनापन […]

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प्रत्येक घर के हर सदस्य की होगी जांच
एलसीडीसी कार्यक्रम पांच सितंबर से
बिहारशरीफ : नालंदा जिले को लेप्रोसी से निजात दिलाने व इसकी रोकथाम के उद्देश्य से हर गांव,कस्बों व टोलों के हर सदस्य के शारीरिक जांच की जायेगी. जांच के दौरान शरीर के किसी अंग किसी अंग में उभरे दाग व उसमें सुनापन की गहरी तौर पर जांच की जायेगी. इस दौरान किसी भी व्यक्ति में उक्त लक्षण पाये जायेंगे तो उसे संदिग्ध मरीज की श्रेणी में रखकर गहन चिकित्सीय जांच की जायेगी. ताकि चिकित्सीय टेस्ट में बीमारी की पुष्टि हो सके. यानी की जांच में लेप्रोसी की वैक्ट्रिया पायी गयी तो उसे लेप्रोसी बीमारी कही जायेगी.
05 से 18 सितंबर तक चलेगा अभियान
रीलेप्रोसी केस डिडेक्शन कंपेन (एलसीडीसी) अभियान जिलेभर में 05 से 18 सितंबर 2016 तक चलेगा. जिले के हर प्रखंड के प्रत्येक गांव में होम सर्च अभियान चलाया जाएगा. इस दौरान लेप्रोसी केस खोज कार्य में लगे कर्मी घर-घर जाकर लेप्रोसी के संदिग्ध मरीजों की पहचान करने का काम करेंगे.
इस कार्य में हर गांव में दो दल काम करेंगे. हर दल में एक आशा व एक पुरुष वोलेंटियर शामिल होंगे. आशा महिलाओं व पुरुष वोलेंटियर पुरुषों की जांच करेंगे. जांच के दौरान शरीर के किसी अंग में तांबे रंग का दाग एक या इससे अधिक पाये जाएंगे तो उसे सस्पेक्टेट मरीज के रूप में की गिनती की जायेगी.
पुष्टि होने पर दी जायेगी एमडीटी की दवा
लेप्रोसी रोग की पुष्टि होने के बाद संबंधित मरीजों को बीमारी से निजात दिलाने के लिए जिला लेप्रोसी निवारण विभाग की ओर से एमडीटी की दवा उपलब्ध करायी जाएगी. पीबी व एमबी के मरीजों को अलग-अलग पावर की दवा दी जायेगी.उम्र के हिसाब से मरीजों को डोज दिया जायेगा.उक्त जीवनरक्षक दवा एमडीटी नि:शुल्क दी जाती है.
यह दवा जिले के हर अस्पताल में उपलब्ध है. लेकिन जो लोग पीलिया (जौंडीस) से पीड़ित हैं उन्हें यह दवा नहीं जायेगी. जौंडीस के मरीज पहले जौंडीस का इलाज करायें.
जौंडीस ठीक हो जाने के बाद ही लेप्रोसी की दवा दी जा सकेगी. इसलिए अभियान दल में शामिल कर्मी इस बात पर ध्यान देंगे कि कोई व्यक्ति में लेप्रोसी के लक्षण पाते हैं और उसे पहले से जौंडीस है तो संबंधित व्यक्ति का इलाज पहले जौंडीस का ही होगा.
प्रभारी व आशा हो चुके हैं ट्रेंड
इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला कुष्ठ निवारण विभाग की ओर से जिले के सभी पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, आशा,आंगनबाड़ी सेविकाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है.
साथ ही एएनएम को भी इस बीमारी की पहचान के लिए ट्रेनिंग दी गयी है. लेप्रोसी में काम करने वाले पारा मेडिकल वर्करों को इसके बीमारी के लक्षण व पहचान के गुर बताये गये हैं. शुक्रवार को भी जिला लेप्रोसी निवारण विभाग की ओर से सेविकाओं को प्रशिक्षित किया गया. चिकित्सा पर्यवेक्षक उमेश प्रसाद ने यह ट्रेनिंग दी.
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