अब सुधरेगी बुनकरों की दशा
Updated at : 21 Jul 2016 4:32 AM (IST)
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पहल. मॉडल वस्त्रों के निर्माण के गुर सीखेंगे सूतकार, छायी खुशी आधुनिक प्रशिक्षण प्राप्त कर बुनकर एक से बढ़ कर एक वस्त्रों की बुनाई कर सकेंगे. नालंदा जिला पूर्व से ही बुनकर के मामलों में अग्रणी था. इस व्यवसाय से जिले के करीब 15 हजार परिवार जुड़े थे. पीढ़ी दर पीढ़ी बुनकर परिवार इस धंधे […]
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पहल. मॉडल वस्त्रों के निर्माण के गुर सीखेंगे सूतकार, छायी खुशी
आधुनिक प्रशिक्षण प्राप्त कर बुनकर एक से बढ़ कर एक वस्त्रों की बुनाई कर सकेंगे. नालंदा जिला पूर्व से ही बुनकर के मामलों में अग्रणी था. इस व्यवसाय से जिले के करीब 15 हजार परिवार जुड़े थे. पीढ़ी दर पीढ़ी बुनकर परिवार इस धंधे को अपना कर जीविका का साधन बनाये हुए थे. बीच में बुनकरों में से कई परिवार इससे मुंह मोड़ लिये थे.
पटना में लेंगे आधुनिक प्रशिक्षण
बिहारशरीफ : बुनकरों के लिए खुशखबरी है. अब उनकी दशा सुधरने वाली है. इसके लिए पहल शुरू की गयी है. मॉडल वस्त्रों के निर्माण के गुर सिखाये जायेंगे. आधुनिक प्रशिक्षण प्राप्त कर बुनकर एक से बढ़ कर एक वस्त्रों की बुनाई कर सकेंगे. नालंदा जिला पूर्व से ही बुनकर के मामलों में अग्रणी था. इस व्यवसाय से जिले के करीब 15 हजार परिवार जुड़े थे. पीढ़ी दर पीढ़ी बुनकर परिवार इस धंधे को अपना कर जीविका का साधन बनाये हुए थे. बीच में बुनकरों में से कई परिवार इससे मुंह मोड़ लिये थे. लेकिन कई परिवार इस पुस्तैनी व्यवसाय को अपनाये रखकर परंपरा को जीवित रखने का काम किया. जिले के 25 सूतकार पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में ट्रेनिंग प्राप्त करेंगे. सात एवं आठ अगस्त को इन लोगों को दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया जायेगा.
पर्दों में वैशाली व बोधगया के मंदिर अंकित होता था
जिले के अस्थावां के श्रीचंदपुर में बुनकरों द्वारा तैयार की जाने वाली पर्दों में वैशाली व बोधगया के मंदिर की कढ़ाई होती थी. जो काफी आकर्षक होता था. इस पर्दे की डिमांड सभी सरकारी कार्यालयों के अलावा अन्य लोग करते थे. कोई सरकारी कार्यालय नहीं था जहां कि इस पर्दे की मांग नहीं होती थी. लेकिन रंगाई मशीन खराब हो जाने के कारण इसकी बुनाई बाधित है. आज भी लोग इसकी डिमांड करते हैं.
झारखंड से लेकर अजमेर तक वस्त्रों की होती थी मांग
जिला खादी ग्राम उद्योग से बनी वस्त्रों की डिमांड राजस्थान से लेकर उत्तरप्रदेश तक होती थी. इसके अलावा झारखंड, हरियाणा में खूब होती थी. इन राज्यों में सबसे अधिक डिमांड पर्दों की ही होती थी. इससे विभाग को भी काफी लाभ होता था. बुनकरों को रोजाना रोजगार मिलता था. जिला खादी ग्रामोद्योग के प्रयास से एक बार फिर बुनकरों व सूतकारों की आस जगी है. अब उन्हें दिन बहुरने वाले हैं. इसके लिए त्रिपुरारी शरण मॉडल चरखे वरदान साबित होगा. इस चरखे से वस्त्रों की बुनाई करने के लिए 25 सूतकारों को प्रथम फेज में प्रशिक्षण के लिए जिला खादी ग्राम उद्योग पटना भेजेगा. इसके लिए सूतकारों की पहचान करने में लगी है. पहचान करने के बाद सूची बनायी जायेगी. प्रशिक्षण प्राप्त कर बुनकर व सूतकार मॉडल वस्त्रों का निर्माण करेंगे. इस तरह उन्हें नियमित रूप से रोजगार प्राप्त होगा.
पंजाब व हरियाणा से कपास का होता था आयात
जिला मुख्यालय में खादी ग्राम उद्योग का अपना विशाल भवन है. जिला खादी ग्राम उद्योग का इतिहास काफी पुराना है. यहां से उत्पादित वस्त्रों की डिमांड दूसरे राज्यों में भी अधिक थी. इस संस्थान से तीन हजार बुनकर जुड़े थे. खादी की धोती,चादर,गमच्छा,परदा,शर्ट ,पैजामा के वस्त्रों की बुनाई बिहारी चरखे से होती थी. इन वस्त्रों के निर्माण के लिए देश के पंजाब व हरियाणा राज्यों से कपास मंगाये जाते थे. उसी कपास से सूतकार सूत की बुनाई कर कपड़ों का निर्माण किया जाता था.
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