नालंदा में करोड़ों रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला

Updated at : 19 May 2016 12:08 AM (IST)
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नालंदा में करोड़ों रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला

1400 की छात्रवृत्ति रोकी गयी, 128 फर्जी संस्थान िचह्नित बिहारशरीफ 1400 फर्जी छात्रों की रोकी गयी राशि बिचौलियों व कुछ कर्मियों की मिलीभगत से वर्षों से चल रहा है खेल बिहारशरीफ : नालंदा जिले में करोड़ों रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला हुआ है. फर्जी तरीके से छात्रवृत्ति के रुपये निकाले जा रहे हैं. तकनीकी संस्थान से […]

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1400 की छात्रवृत्ति रोकी गयी, 128 फर्जी संस्थान िचह्नित

बिहारशरीफ
1400 फर्जी छात्रों की रोकी गयी राशि
बिचौलियों व कुछ कर्मियों की मिलीभगत से वर्षों से चल रहा है खेल
बिहारशरीफ : नालंदा जिले में करोड़ों रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला हुआ है. फर्जी तरीके से छात्रवृत्ति के रुपये निकाले जा रहे हैं. तकनीकी संस्थान से लेकर छात्र तक इसमें शामिल हैं.
इसकी सूचना पर विभाग भी अलर्ट हो गया है. जांच के बाद फिलहाल छात्रवृत्ति राशि का भुगतान रोक दिया गया है. जिला कल्याण विभाग ने 1400 फर्जी आवदेनों काे चिह्रित किया है. इन आवेदनों की जांच में खुलासा हुआ है कि छात्र से लेकर तकनीकी संस्थान तक फर्जी हैं. फर्जी तकनीकी संस्थानों के नामों पर बैंक खाता खोल कर वर्षों से छात्रवृत्ति की राशि हड़पी जा रही है. इसमें बिचौलिये लेकर विभाग के कुछ कर्मियों की भी
नालंदा में करोड़ों…
मिलीभगत की आशंका है. राज्य के बाहर ऐसे सैकड़ों ऐसे इंस्टीट्यूट हैं, जो छात्रों के छात्रवृत्ति के रुपये से मालामाल हो रहे हैं. वैसे संस्थानों द्वारा सैकड़ों छात्रों के नाम नाम पर आवेदन डलवा देता है. पैरवी के बल ट्यूशन व अन्य खर्च के नाम पर एक लड़के के नाम से 70 से 90 हजार रुपये प्रति छात्र सहजता से संस्थान के नाम पर बने खाते में रुपये पहुंच जाते हैं.
जांच के लिए बाहर भेजे गये अधिकारी : घोटाले की धमक मिलने के बाद जिले के सभी छह प्रखंड कल्याण पदाधिकारी को विभिन्न राज्यों में भेजा गया है. बिहारशरीफ प्रखंड कल्याण पदाधिकारी को झारखंड भेजा गया है, जबकि गिरियक, हिलसा, एकंगरसराय, राजगीर व बिंद के प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों को क्रमश: पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश व जम्मू-कश्मीर भेज गया है. उक्त अफसरों को आवेदित संस्थानों की वास्तविक स्थिति की जांच करने का आदेश दिया गया है. साथ ही आवेदित छात्रों की वास्तविकता की भी जांच करने को कहा गया है. जांच पर गये अधिकारी भी जिला कल्याण पदाधिकारी को मोबाइल पर यह सूचना दे रहे हैं कि फर्जीवाड़ा हुआ है. छात्रवृत्ति की राशि की भुगतान रोकनी होगी.
14 हजार छात्रों को आवेदन रिजेक्ट
वित्तीय साल में बिहार से बाहर पढ़ने वाले 14220 छात्रों के आवेदनों को रद्द किया गया है. जांच के दौरान बहुत से छात्र का आवासीय पता गलत पाया गया है. कई का तो एकाउन्ट नंबर कुछ और नाम कुछ और पाया गया था. साथ ही जिन संस्थानों के नाम लिखा गया था वह धरातल पर नहीं था.
जिला कल्याण पदाधिकारी योगेेंद्र पाठक ने कहा कि गड़बड़ी उजागर होने के बाद 14 हजार छात्रों की छात्रवृत्ति रोक दी गयी है. इससे तीन करोड़ 20 लाख रुपये की बचत इस साल हुई है. जांच के लिए छह प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों को बिहार से बाहर भेजा गया है. झारखंड के जमशेदपुर में बीडब्ल्यूओ नामक एक संस्थान की जांच में पाया गया कि लड़के झारखंड के हैं, पर आवासीय नालंदा का दिया है.
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