शराब के शौकीन शहर में भटकते रहे

बिहारशरीफ : शहर का व्यस्ततम चौक भराव पर चौराहा दक्षिणी सब्जी मंडी के पास शराब की दुकानें हैं. गुरुवार का दिन है, 12 बजे हैं. सब्जी मंडी होने की वजह से लोगों की आवाजाही तेज है. सड़क के दोनों तरफ पूरब और पश्चिम शराब की दुकानें हैं, जिसमें आज ताला लटका है. दुकानदार का भी […]
बिहारशरीफ : शहर का व्यस्ततम चौक भराव पर चौराहा दक्षिणी सब्जी मंडी के पास शराब की दुकानें हैं. गुरुवार का दिन है, 12 बजे हैं. सब्जी मंडी होने की वजह से लोगों की आवाजाही तेज है. सड़क के दोनों तरफ पूरब और पश्चिम शराब की दुकानें हैं, जिसमें आज ताला लटका है. दुकानदार का भी अता-पता नहीं है. आसपास के दुकानदार बताते हैं कि दुकान में शराब ही नहीं है.
पहले ही शराब खत्म हो गयी है. इसलिए बंद कर दुकानदार चला गया है. स्थानीय लोग बताते हैं कि दुकान में शराब ही नहीं है. पहले ही शराब खत्म हो गयी है. इसलिए बंद कर दुकानदार चला गया है. स्थानीय लोग बताते हैं कि एक अप्रैल से देशी शराब की बिक्री पर रोक व अंग्रेजी शराब सरकारी स्तर पर बेचने की घोषणा से दुकानदार ने कम शराब का उठाव किया था,
जो होली के समय ही बिक गया था. उसके बाद से शराब का उठाव नहीं हुआ था. इसी बातचीत के दौरान एक युवक बुजुर्ग व्यक्ति को बाइक पर बैठा कर वहां से गुजर रहा था. बाइक पर पीछे बैठे बुजुर्ग बाइक चला रहे युवक से कहते हैं एक मिनट, एक मिनट रूको. बाइक की रफ्तार धीमी हो जाती है, मगर रूकती नहीं है. बाइक चला रहे युवक बोल उठता है
– क्या हुआ! बुजुर्ग कहते हैं कि जरा रूको तो सही. इस पर बाइक चला रहा युवक कहता है कि काहेला! सब्जी खरीदना है क्या! घर में तो सब्जी हैं ही! बुजुर्ग कहता है कि देखते हैं कि शराब की दुकान खुली है या नहीं. बाइक रूक जाती है और बुजुर्ग कभी इधर तो कभी उधर देखने के बाद बाइक चला रहे युवक से कहता है कि आज से बंद हो गलऊ शराब के दुकान. दुकानदारवो पर नजर न पड़ हऊ. बाइक चलाने वाला युवक इस पर कहता है कि अब छोड़ऊ ई शराब का नशा.
शराब के दुकनमो बंद हो गेलो, मगर तोहर जी अब तक न मान रहलो हे. चलऊ घरवा मम्मी से कह लियो. इसके बाद युवक बाइक चलाते हुए आगे बढ़ जाता है. शाम तक भराव पर सब्जी मंडी की दोनों दुकानें बंद रही. लोग आते रहे, नजर दुकान की ओर दौड़ाते और चुपचाप निकल जाते. यहीं नजारा कचहरी चौराहा एवं हॉस्पीटल मोड़ की भी रही. दोनों जगह भी शराब की दुकानें बंद दिखी. ना तो शराब बेचने वाले दिखे और ना ही शराब पीने वाले. इन दोनों जगहों की शराब की दुकानों में ताले लटके रहे. कचहरी चौराहा के पास चाय की दुकान पर कुछ लोग बैठे हैं और शराब बंदी पर चर्चा करने में मशगूल है.
हाथ में चाय का गिलास थाने एक अधेड़ कहता है कि अब तो शराब का शौक पूरा करने के लिए ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे. अब तो शराब सरकार द्वारा निर्धारित दुकानों पर ही मिलेगा. चाय की चुस्की लेता हुआ एक व्यक्ति बोल पड़ता है कि अब क्या करबू नेताजी, आज तो दुकनमे बंद हो. इस पर पहले वाला व्यक्ति शायराना अंदाज में कहता है कि अब तो उतनी भी मयस्सर नहीं मयखाने में, हम जितनी छोड़ दिया करते थे पैमाने में. वहीं अस्पताल चौक के पास जूस बेचने केि लए कई ढेला लगे हुए हैं. शराबी लोगों की शाम यहां रंगीन होती थी और लोग जूस में शराब को मिला कर लुत्फ उठाया करते थे.
एक भलमानस जूस की दुकान के पास ही बैठे है. सामने की शराब की दुकान में ताले लटके हैं. जूस दुकानदार से उस भलमानस की बातचीत हो रही है. भलमानस दिखाने वाले व्यक्ति कहते हैं कि शराब और मेरा ब्रेकअप हजारों बार हो चुका है, हर बाद कंबख्त मुझे मना लेती है.”
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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