शिक्षकों की मनमानी के खिलाफ ग्रामीणों का विद्यालय में हंगामा

Updated at : 12 Apr 2018 4:42 AM (IST)
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शिक्षकों की मनमानी के खिलाफ ग्रामीणों का विद्यालय में हंगामा

मध्याह्न भोजन की राशि बंदरबांट करने का लगाया आरोप शिक्षकों पर जूता से मारने का लगाया आरोप पढ़ाने की जगह खेलने का निर्देश देते हैं स्कूल के शिक्षक बिंद (नालंदा) : स्थानीय प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय विशुनपुर टोला में शिक्षकों की मनमानी के खिलाफ अभिभावकों ने जमकर हंगामा किया. स्कूल में बच्चों को मध्याह्न […]

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मध्याह्न भोजन की राशि बंदरबांट करने का लगाया आरोप

शिक्षकों पर जूता से मारने का लगाया आरोप
पढ़ाने की जगह खेलने का निर्देश देते हैं स्कूल के शिक्षक
बिंद (नालंदा) : स्थानीय प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय विशुनपुर टोला में शिक्षकों की मनमानी के खिलाफ अभिभावकों ने जमकर हंगामा किया. स्कूल में बच्चों को मध्याह्न भोजन नहीं मिलने तथा बच्चों को जूते से पिटाई करने को लेकर लोग काफी नाराज थे. अविभावक नागेश्वर चौहान, शिवालक चौहान, गिरिजा चौहान, देवनंदन चौहान, कामाक्षी चौहान सहित कई लोगों का कहना था कि विद्यालय में बच्चों को मात्र चार दिन मध्याह्न भोजन दिया जाता है. बच्चों की जूते से पिटाई करने प्रधानाध्यापिका द्वारा मध्याह्न भोजन योजना की राशि का बंदरबांट करने शिक्षक सुरेंद्र पासवान पर महीने में चार दिन विद्यालय आने और पूरे महीने की हाजिरी बनाने,
बच्चों को जूते से पिटाई करने सहित कई गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षकों की मनमानी करने बच्चों की जूते से पिटाई करने की शिकायत शिक्षा अधिकारियों से की गयी थी. बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ. अभिभावकों ने इसकी जांच करा दोषी शिक्षकों पर कार्रवाई करने की मांग अधिकारियों से की. इस स्कूल में लगभग 130 बच्चे नामांकित हैं. प्रथम कक्षा से लेकर अष्टम वर्ग तक की पढ़ाई होती है. तीन शिक्षक कार्यरत हैं, जिसमें से एक डिप्टेशन में गये हुए हैं.
शिक्षक सुरेंद्र पासवान की मनमानी चलती है. महीने में सिर्फ चार से पांच दिन स्कूल आते हैं और एक ही दिन सारे दिनों का हाजिरी बना देते हैं. स्कूल छात्र चंद्रभान कुमार ने आरोप लगाया है कि स्कूल के शिक्षक सुरेंद्र पासवान शुक्रवार के दिन अंडा मांगने पर जूते से मारते हैं. छात्र धर्मराज कुमार, अमित कुमार, सतीश कुमार, दुलारचंद कुमार, अजीत कुमार, रवि कुमार का कहना है
कि जब शिक्षक को पढ़ाने के लिए बोलते हैं तो नहीं पढ़ाते हैं और कहते हैं कि तुम लोग पढ़ कर क्या करोगे जाओ खेलो. स्कूल में कार्यरत रसोइया सहोदरी देवी, उषा देवी व श्यामपुरा देवी का कहना है कि महीने में चार से छह दिन ही मध्याह्न भोजन बनता है वह भी बच्चों की उपस्थिति के हिसाब से मध्याह्न भोजन में उपयोग होने वाली सामग्री उपलब्ध नहीं करायी जाती है.
स्थायी बीईओ के अभाव में विद्यालय की नहीं होती जांच
बिंद में स्थायी बीईओ के नहीं रहने से विद्यालय की नियमित जांच नहीं हो रही है. जांच नहीं होने से विद्यालय की मनमानी चरम पर है. सरमेरा के बीईओ बिंद के प्रभार में हैं. बीईओ की कमी का खामियाजा स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है, जिससे अभिभावकों में काफी रोष है. सचिव कौशिल्या देवी ने बताया कि विद्यालय में सप्ताह में एक दिन बच्चों को मध्याह्न भोजन मिलता है. शिक्षक की मनमानी की शिकायत बीईओ से की गयी थी. प्रधानाध्यापिका उषा कुमारी ने बताया कि रसोइया अपनी मनमर्जी करती हैं.
वह खाना नहीं बनाती हैं तो हम क्या कर सकते हैं. बीईओ सुरेश सिंह ने कहा कि ग्रामीणों के लगाये गये आरोपों की जांच कर शिक्षकों पर कार्रवाई की जायेगी. मध्याह्न भोजन प्रभारी शशिरंजन कुमार ने कहा कि विद्यालय में प्रत्येक माह पोषाहार की सामग्री उपलब्ध करायी जा रही है.
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