उपयुक्त अवसर मिले तो पुरुषों से बेहतर कर सकती हैं महिलाएं

Updated at : 20 Mar 2018 4:51 AM (IST)
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उपयुक्त अवसर मिले तो पुरुषों से बेहतर कर सकती हैं महिलाएं

बिहारशरीफ : महिलाओं की दयनीय स्थिति का प्रमुख कारण अशिक्षा, आर्थिक निर्भरता, धार्मिक निषेध, जाति बंधन, पुरुषों का उनके प्रति अनुचित दृष्टिकोण आदि है. पुरुष वर्ग की ओर से स्त्रियों को आज भी कमजोर माना जाता है. ये बातें सोमवार को प्रभात खबर द्वारा ‘बिहार में महिलाओं के उत्थान के लिए क्या किया जाये’ विषय […]

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बिहारशरीफ : महिलाओं की दयनीय स्थिति का प्रमुख कारण अशिक्षा, आर्थिक निर्भरता, धार्मिक निषेध, जाति बंधन, पुरुषों का उनके प्रति अनुचित दृष्टिकोण आदि है. पुरुष वर्ग की ओर से स्त्रियों को आज भी कमजोर माना जाता है. ये बातें सोमवार को प्रभात खबर द्वारा ‘बिहार में महिलाओं के उत्थान के लिए क्या किया जाये’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में शहर की महिलाओं ने कहीं. उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में महिलाओं के प्रति मानसिकता में बदलाव आया है. पहले नौकरी वाली महिलाओं के पति को ‘औरत की कमाई खाने वाला’ कहकर चिढ़ाया जाता था. आज स्थिति बदल चुकी है. आज नारी राजनीति, कारोबार, कला

उपयुक्त अवसर मिले…
तथा नौकरियों में नया आयाम गढ़ रही हैं. आज नारी न केवल विभिन्न क्षेत्रों में अपने को स्थापित कर रही हैं, बल्कि सफलता के झंडे भी गाड़ रही है. नारी के उत्थान में अशिक्षा व असुरक्षा की भावना का उल्लेख करते हुए महिलाओं ने कहा कि गांधी जी ने नारी शिक्षा पर जोर देते हुए कहा था कि एक लड़के की शिक्षा की अपेक्षा एक लड़की की शिक्षा महत्वपूर्ण है, कारण कि माता ही बच्चों की पहली अध्यापक होती हैं. शिक्षित महिलाएं न सिर्फ बच्चों को पढ़ा सकती हैं बल्कि समाज के विकास में भी योगदान कर सकती हैं. आज की महिलाएं आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी बन रही हैं और पुरुष प्रधान क्षेत्रों में भी अपनी योग्यता प्रदर्शित कर रही हैं. महिलाएं नयी मंजिलें और नये रास्तों का निर्माण कर रही हैं.
संगोष्ठी को संयोगिता कुमारी, फरीदा खान, चंचल गुप्ता, प्रियंका शर्मा, गायत्री चौरसिया, मधु मेहता, वीणा सिन्हा, सुधा रानी, निशात फातिमा, प्रियंका, चंपा मंडल, रफत परवीन, ममता कुमारी, उर्वशी सिन्हा आदि ने संबोधित किया. सभी ने इस बात पर सहमति जतायी कि धीरे-धीरे महिलाओं के प्रति लोगों की मानसिकता बदल रही है. विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं को आरक्षण देकर उन्हें बराबरी का हक दिलाने का प्रयास किया जा रहा है. इसके अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं. आने वाले दिनों में महिलाएं,पुरुषों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहेंगी, ऐसी उम्मीद हैं.
महिलाओं का उत्थान कैसे हो पर प्रभात खबर की परिचर्चा
महिलाओं के प्रति लोगों को मानसिकता बदलने की जरूरत है. पुरुषों के समान नारी को भी बराबरी का हक दिया जाना चाहिए. स्त्री शिक्षा को प्रमुख स्थान दिया जाना चाहिए. बाल-विवाह, दहेज प्रथा, दहेज हत्या जैसी कुरीतियों व घटनाओं से महिलाओं को मुक्ति दिलानी चाहिए. महिलाओं को उसके अधिकार की जानकारी दी जानी चाहिए. महिलाओं को शिक्षित बनाकर, महिलाओं के प्रति सोच को बदलकर, सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति दिलाकर बराबरी का हक मिले तो महिलाओं के उत्थान का रास्ता साफ हो जायेगा. संगोष्ठी में महिलाओं ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास में सर्वोत्तम थर्मामीटर महिलाएं हैं. जहां की महिलाएं पढ़ी-लिखी व आत्मनिर्भर होंगी, वह राष्ट्र समृद्ध होगा. आज की नारी न केवल शिक्षिका, नर्स व डॉक्टरी के क्षेत्र को अपना रही हैं, बल्कि इंजीनियर, पायलट, वैज्ञानिक, सेना अधिकारी व पत्रकारिता के क्षेत्र में भी ख्याति प्राप्त कर रही हैं.
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