मछलीपालन से नालंदा के 840 युवाओं की बदल गयी तकदीर

Updated at : 17 Mar 2018 4:50 AM (IST)
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मछलीपालन से नालंदा के 840 युवाओं की बदल गयी तकदीर

जिले के 450 मत्स्यपालकों ने ली ट्रेनिंग बिहारशरीफ : जिले के स्वरोजगार के इच्छुक लोगों के लिए मछलीपालन में असीम संभावनाएं हैं. खास बात यह है कि इस उद्योग को स्थापित करने में बिहार सरकार का मत्स्य विभाग भी आर्थिक मदद कर रहा है. ऐसे स्वरोजगार के इच्छुक लोगों को विभाग पहले ट्रेंड कर रहा […]

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जिले के 450 मत्स्यपालकों ने ली ट्रेनिंग

बिहारशरीफ : जिले के स्वरोजगार के इच्छुक लोगों के लिए मछलीपालन में असीम संभावनाएं हैं. खास बात यह है कि इस उद्योग को स्थापित करने में बिहार सरकार का मत्स्य विभाग भी आर्थिक मदद कर रहा है. ऐसे स्वरोजगार के इच्छुक लोगों को विभाग पहले ट्रेंड कर रहा है और फिर अनुदान भी दे रहा है. इसके लिए सरकार की कई योजनाएं भी चलायी जा रही हैं. अगर विभाग के आंकड़ों को देखें तो अबतक जिले में कुल 840 युवाओं ने इस रोजगार से खुद की तकदीर बदल दी है. साथ ही करीब 450 मत्स्यपालकों को विभाग की पहल पर देश प्रदेश में ट्रेंड किया जा चुका है. जिले में तकरीबन एक सौ तालाबों में मछलीपालन की जा रही है. इन तालाबों में मौसमी एवं सदाबहार मत्स्यपालन की जा रही है.
आज कोनकाडा जायेंगे 22 मछलीपालक : मछली पालन का बेहतर गुर सीखने और इस उद्योग में दक्षता हासिल करने के लिए नालंदा के कुल 22 किसानों को प्रशिक्षण दिये जाने के लिए चयनित किया गया है. इन सभी किसान को आंध्र प्रदेश के कोकानाडा में प्रशिक्षण किया जायेगा. इसलिए शनिवार को विभाग के खर्चे पर सभी किसान आंध्र प्रदेश के लिए रवाना हो रहे हैं.
जिले में चल रहीं छह हैचरी : जिले में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए फिलहाल छह हैचरी चल रहा है. इसमें नालंदा स्थित मोहनपुर, बिहारशरीफ स्थित गगनदीवान और अस्थावां के गिलानी में सरकारी हैचरी है. इसी प्रकार निजी क्षेत्रों में सारे में पुरुषोत्तम कुमार , एकंगरसराय में गौरी शंकर सिंह एवं औंगारी में राजीव रंजन कुमार हैचरी चला रहे हैं. गौरतलब है कि मत्स्य हैचरियों में उत्तम गुणवत्ता के बीज उत्पादन कर इसकी आपूर्ति नालंदा समेत इसके पड़ोसी जिले में की जा रही है. इसके अलावे जिले में दो अतिरिक्त हैचरी निर्माण का प्रस्ताव चल रहा है. इसमें परबलपुर स्थित गजीन बिगहा एवं दीपनगर स्थित शेखोपुर शामिल है.
उद्यमियों को मिल रहा है अनुदान : मत्स्य उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चलायी जा रही हैं. इसमें आर्द भूमि में तालाब निर्माण, हैचरी निर्माण एवं फिश फीड शामिल है. इन सभी योजनाओं में उद्यमी को 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है. इसी प्रकार अनुसूचित जाति के उद्यमियों को 90 प्रतिशत अनुदान नर्सरी तालाब एवं टयूबवेल पंपसेट लगाने पर दिया जा रहा है.
योजनाओं से मिल रहा है मत्स्यपालकों को लाभ
जिले में स्वरोजगार के इच्छुक लोगों को मछलीपालन में ट्रेंड कर उन्हें इस उद्योग की स्थापना के लिए विभागीय नियमानुसार अनुदान भी दिया जा रहा है. सरकार की चल रही कई योजनाओं से मत्स्यपालकों को लाभ मिल रहा है. शनिवार को कुल 22 किसान मछलीपालन का गुर सीखने कोनकाडा के लिए रवाना हो रहे हैं.
अशोक कुमार सिन्हा, जिला मत्स्य पदाधिकारी, नालंदा
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