निर्माण इकाई का लेंगे जायजा

Updated at : 27 Sep 2017 5:53 AM (IST)
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निर्माण इकाई का लेंगे जायजा

राजगीर : आयुध निर्माणी नालंदा में विगत दिनों रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में स्वर्णिम अध्याय की शुरूआत की है . निर्माणी ने निर्धारित अवधि से पूर्व ही एक लाख बीएमसीएस मॉड्यूल निर्माण करने में सफल रही है. इस स्वर्णिम क्षण काे यादगार बनाने के लिए रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे को एक लाख वां बीएमसीएस मॉड्यूलस […]

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राजगीर : आयुध निर्माणी नालंदा में विगत दिनों रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में स्वर्णिम अध्याय की शुरूआत की है . निर्माणी ने निर्धारित अवधि से पूर्व ही एक लाख बीएमसीएस मॉड्यूल निर्माण करने में सफल रही है. इस स्वर्णिम क्षण काे यादगार बनाने के लिए रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे को एक लाख वां बीएमसीएस मॉड्यूलस देश के नाम समर्पित करेगी.

आयुध निर्माणी नालंदा के महाप्रबंधक शरद घोडके ने मंगलवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आयुध निर्माणी नालंदा देश के सुरक्षा का एक बहुत ही महत्वपूर्ण इकाई बन गया है. इन्हीं कारणों के चलते रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे का आगमन कल आयुध निर्माणी नालंदा में होने जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस दौरान निर्माणी के मंदिर के पास पौधारोपन भी करेंगे. इस दौरान उन्हें बीएमसीएस यूनिट दिखायी जायेगी. फिर ऑडिटोरियम में एक समारोह के दौरान उन्हें एक लाख वां बीएमसीएस मॉड्यूल समर्पित किया जायेगा. उनके साथ आयुध निर्माणी बोर्ड के मेंबर सौरभ कुमार व अन्य अधिकारी भी साथ होंगे.

पूरी तरह से स्वेदशी है बीएमसीएस मॉड्यूल :आयुध निर्माणी नालंदा में उत्पादित होने वाले अत्याधुनिक बीएमसीएस पूरी तरह से स्वदेशी होने के कारण मेक इन इंडिया का यह एक ताजा उदाहरण भी है. यहां उत्पादित बीएमसीएस सामरिक महत्व का है, जो 155 एमएम की आर्टलरी ताेपों में प्रयुक्त होता है. इसकी मारक क्षमता 5 से 35 किलोमीटर तक है. रक्षा मंत्रालय के अन्य सुरक्षा इकाइयों से मदद लेकर इसका उत्पादन यहां किया जाता है. यह बोफोर्स तोपों को गति देने का काम करता है. लक्ष्य और दूरी के हिसाब से प्रोप्लैंट का उपयोग बोफोर्स तोपों में किया जाता है.
पहले विदेशों से आयात होते थे बीएमसीएस :आयुध निर्माणी नालंदा में उत्पादन के पूर्व बीएमसीएस (वायो मोड्यूल चार्ज सिस्टम) पहले अफ्रीका व जर्मनी से भारत में आयात किये जाते थे. जिसके कारण इसकी कीमत प्रति बीएमसीएस 19 हजार रुपये होता था. अब यहां उत्पादन के बाद इसकी कीमत 14 हजार रुपये पड़ता है. इस तरह से प्रति वर्ष 100 करोड़ रुपये की बचत हो रही है. वहीं देश की मुद्रा को दूसरे देशों में जाने से भी बचाया जा रहा है. दो लाख बीएमसीएस मॉड्यूल निर्माण का ऑर्डर मिला है. भारतीय सेना से आयुध निर्माणी नालंदा को इस वित्तीय वर्ष में दो लाख बीएमसीएस मॉड्यूल निर्माण का ऑर्डर मिला है.
जिसमें से 1 लाख से अधिक का निर्माण यहां सफलतापूर्वक कर लिया गया है. तीन हजार एकड़ में फैली है आयुध निर्माणी नालंदा राजगीर के पूर्वी क्षेत्र में स्थित है. यह आयुध निर्माणी संगठन की 40 वी इकाई है. इसका उद्घाटन 14 अप्रैल 1999 को हुआ था. इस अवसर पर आयुध निर्माणी वर्क मैनेजर फोर एडमिन जेनरल मैनेजर ओपी तिवारी, परियोजना प्रबंधक कुमार अांबेडकर, प्रवीण कुमार, जयद्वीप सरकार व अन्य उपस्थित थे.
सेना को भेजने के पूर्व किया जाता है फायरिंग प्रूफ
बीएमसीएस मॉड्यूल का फायरिंग प्रूफ कर ही सेना को भेजा जाता है. इसकी फायरिंग क्षमता और रफ्तार देने की गति की जांच उड़ीसा के बालासुर पीएक्सई में किया जाता है. महाप्रबंधक ने बताया कि अब तक आयुध निर्माणी नालंदा में उत्पादित एक भी मॉड्यूल को खराब नहीं पाया गया है.
कई उद्योगों को भी किया गया है विकसित :
आयुध निर्माणी नालंदा में कई मध्यम और लघु उद्योगों को भी विकसित किया गया है. जिसमें लगभग 300 लोगों को रोजगार मिला है. इस लघु उद्योगों में बीएमसीएस के लिए रॉ मैटेरियल तैयार किया जाता है. जिसके सहारे रक्षा उत्पादों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने में निर्माणी नालंदा सफल रहा है.
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