ओडीएफ को मिला यूनिसेफ का साथ

Updated at : 23 Aug 2017 5:33 AM (IST)
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ओडीएफ को मिला यूनिसेफ का साथ

पहल. नालंदा को खुले में शौचमुक्त बनाने में जुटा प्रशासन, ओडीएफ बनाने पर मिलेगा इनाम बिहारशरीफ : नालंदा जिले को खुले में शौचमुक्त बनाने में यूनिसेफ ने भी जिला प्रशासन के साथ हाथ बढ़ाया है. अब जिले को ओडीएफ बनाने में यूनिसेफ की अहम भूमिका होगी. जिला प्रशासन को नालंदा को 26 जनवरी तक खुले […]

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पहल. नालंदा को खुले में शौचमुक्त बनाने में जुटा प्रशासन, ओडीएफ बनाने पर मिलेगा इनाम

बिहारशरीफ : नालंदा जिले को खुले में शौचमुक्त बनाने में यूनिसेफ ने भी जिला प्रशासन के साथ हाथ बढ़ाया है. अब जिले को ओडीएफ बनाने में यूनिसेफ की अहम भूमिका होगी. जिला प्रशासन को नालंदा को 26 जनवरी तक खुले में शौचमुक्त करने में यूनिसेफ लगनता के साथ काम करेगा. फिलहाल जिले के दो प्रखंडों हरनौत व गिरियक को अपने जिम्मे लिया है, जहां जिला प्रशासन के सहयोग से लोगों को ट्रेनिंग देगी कि कैसे गांव को खुले में शौचमुक्त करना है. मंगलवार को यूनिसेफ के दो अधिकारी डीएम डॉ त्यागराजन से मुलाकात कर नालंदा को ओडीएफ बनाने के लिए अपनी मंजूरी दी.
डीएम और यूनिसेफ के अधिकारियों की घंटों बैठक में यूनिसेफ के स्टेट हेड बिहार के प्रवीण मोरे और एक वरीय अधिकारी शशिभूषण ने नालंदा को कैसे ओडीएफ करना है, उसके बारे में अपनी रणनीति बतायी. बैठक के बाद डीएम डॉ त्यागराजन ने बताया कि नालंदा सूबे का तीसरा जिला है, जो ओडीएफ के लिए जिला प्रशासन को साथ दे रहा है. इसके पहले यूनिसेफ ने सूबे के दो जिले सीतामढ़ी और रोहतास को ओडीएफ के लिए अपने हाथ में लिया था, जहां पिछले एक साल में बेहतर रिजल्ट सामने आये हैं. अब नालंदा में भी ओडीएफ के मामले में बेहतर रिजल्ट देने के लिए इस पर काम करेगा. प्रथम चरण में यूनिसेफ ने हरनौत व गिरियक को चुना है.
26 जनवरी तक जिले को ओडीएफ करने का संकल्प : नालंदा जिले को पूरी तरह से खुले में शौचमुक्त करने के लिए जिला प्रशासन कटिबद्ध है. इसके लिए डीएम स्वयं कटिबद्ध हैं. डीएम ने बताया कि 26 जनवरी तक पूरे जिले को ओडीएफ कर दिया जायेगा. अभी फिलहाल 505 वार्डों को ओडीएफ किया जा चुका है, जबकि इस साल में पांच माह के तहत 29 हजार शौचालयों का निर्माण किया जा चुका है. सामुदायिक लोगों द्वारा 27 पंचायतों को ओडीएफ करने की बात सामने आयी है, लेकिन प्रशासन अभी एक भी पंचायत को ओडीएफ घोषित नहीं किया है.
पंचायतों को ओडीएफ बनाने वालों को मिलेगा प्रतिदिन दो सौ का मानदेय
डीएम सहित जिले के अधिकारी ओडीएफ का बैच लगाकर कर रहे काम
डीएम का सरकारी वाहन बना ओडीएफ प्रचार वाहन
ओडीएफ बनाओ और दो सौ का मानदेय पाओ
पंचायत को ओडीएफ बनाने यानी पंचायत को खुले में शौचमुक्त करने के लिए यूनिसेफ ने दो सौ का मानदेय भी देगा. डीएम डॉ त्यागराजन ने बताया कि जिले की एक पंचायत में पांच लोगों को प्रतिदिन दो-दो सौ का मानदेय दिया जायेगा, जो पंचायत के तहत गांव को खुले में शौचमुक्त बनाने में काम करेंगे. इतना ही नहीं, जब पंचायत ओडीफ हो जायेगा, तो एेसे लोगों को 25-25 हजार देकर सम्मानित भी किया जायेगा. एेसे लोगों का चयन किया जायेगा, जो ओडीएफ के लिए काम करेंगे. उन्हीं को हर दिन मानदेय मिलेगा.
ओडीएफ के नारों से पटा डीएम का वाहन
जिले को खुले में शौचमुक्त करने के लिए डीएम ने एक अनूठी पहल की है. स्वयं डीएम अपने सरकारी वाहन को ओडीएफ के स्लोगन से पाट दिया है, ताकि लोगों में जागरूकता आये. डीएम का यह सरकारी वाहन चर्चा का विषय बना हुआ है. लोगों का कहना है कि सूबे के ये पहले डीएम हैं, जो सरकारी वाहन में भी ओडीएफ के नारों से पाट दिया है.
ओडीएफ का बैच लगाकर काम कर रहे अधिकारी
जिला प्रशासन किसी तरह से 26 जनवरी तक जिले को ओडीएफ बनाने के लिए दिन-रात लगा हुआ है. जागरूकता से लेकर बैनर, पोस्टर, स्लोगन से लोगों को ओडीएफ के लिए प्रेरित किया जा रहा है. स्वयं डीएम ओडीएफ के स्लोगन का बैच लगाकर अपने चैंबर में काम कर रहे हैं. जिले के वरीय अधिकारी भी पीछे नहीं हैं. वे भी डीएम के अनुसरण करते हुए ओडीएफ के स्लोगन युक्त बैच लगाकर अपने विभागों में काम कर रहे हैं.
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