शराब की खोज में हथियार की बरामदगी बंद
Updated at : 02 Aug 2017 6:58 AM (IST)
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अवैध हथियारों की मंडी के रूप में जाना जाता है चिकसौरा बाजार बिहारशरीफ : नालंदा की धरती महान विरासत की धनी रही है. यहां का इतिहास गौरवशाली रहा है. कभी पूरे विश्व के लोग ज्ञान प्राप्त करने नालंदा आते थे. नालंदा विश्वविद्यालय को दुनिया ने ज्ञान का भंडार माना. यहीं से चाणक्य ने ज्ञान पाकर […]
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अवैध हथियारों की मंडी के रूप में जाना जाता है चिकसौरा बाजार
बिहारशरीफ : नालंदा की धरती महान विरासत की धनी रही है. यहां का इतिहास गौरवशाली रहा है. कभी पूरे विश्व के लोग ज्ञान प्राप्त करने नालंदा आते थे. नालंदा विश्वविद्यालय को दुनिया ने ज्ञान का भंडार माना. यहीं से चाणक्य ने ज्ञान पाकर एक चरवाहे को सम्राट की उपाधि दिलायी थी. वर्तमान परिवेश में हमारा जिला अपने सौंदर्य से विमुख हो गया है. आज की तारीख में यहां बंदूकें गरजती हैं. गोलियां चलनी तो आम बात हो गयी है.
यक्ष प्रश्न है कि आखिर जिले में इतनी बड़ी मात्रा में असलहे आते कहां से हैं. पुलिस के पास भी इसका कोई ठोस जवाब नहीं है. नालंदा पुलिस कहती है कि हथियारों से संबंधित कोई जानकारी के बाद कार्रवाई की जाती है. पुलिस का खुफिया विभाग बताता है कि अपराधियों द्वारा जिले में जितने भी छोटे टाइप के हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसका निर्माण नालंदा के चिकसौरा में होता है.
मुंगेर निर्मित हथियार की भी होती है आपूर्ति : मुंगेर जिला पूरे भारत में हथियार निर्माण के लिए प्रसिद्ध है. नालंदा से मुंगेर की दूरी करीब तीन घंटे की है. मुंगेर से भी हथियारों की तस्करी धड़ल्ले से होती है. मुंगेर में कई तरह के हथियार उपलब्ध हो जाते हैं. मुंगेर निर्मित पिस्टल का लेआउट काफी उम्दा होता है. मुंगेर में हथियार के साथ गोलियों का भी निर्माण किया जाता है. नालंदा जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से बरामद उम्दा पिस्टल मुंगेर निर्मित होने की बात पुलिस द्वारा बतायी गयी है.
पुलिस का हथियार से ज्यादा शराब पर फोकस
बिहार में शराबबंदी की घोषणा के बाद शराब की बरामदगी की तरफ पुलिस तंत्र की रुचि ज्यादा बढ़ गयी है. एक साल में पूरे नालंदा जिले से पुलिस द्वारा तीन करोड़ से अधिक की शराब बरामदगी की गयी. लेकिन, इस अनुपात में अवैध हथियारों की बरामदगी बहुत कम रही. साल भर में एक भी गन फैक्टरी का खुलासा पुलिस द्वारा नहीं किया जा सका, जबकि जिले में विगत 120 दिनों के अंदर करीब 12 लोगों की हत्या देसी पिस्तौल से गोली मार कर की गयी. इसी तरह 50 से अधिक लोगों को गोली मार कर जख्मी कर दिया गया.
चिकसौरा बाजार हथियारों की मंडी के रूप में प्रचलित
चिकसौरा बाजार पूरे सूबे में आज भी हथियारों की मंडी के रूप में जाना जाता है. चिकसौरा थाना क्षेत्र हिलसा अनुमंडल के अंतर्गत आता है. यह पूरा इलाका आज भी नक्सल प्रभावित है. झारखंड के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीएलएफआइ की पकड़ आज भी इस इलाके में कायम है. चिकसौरा बाजार में बड़े पैमाने पर कई तरह के हथियारों का निर्माण होता रहा है. चुनाव के दिनों में हथियारों का निर्माण कार्य और तेज हो जाता है. हालांकि नालंदा पुलिस की सख्ती के बाद फिलहाल हथियार निर्माण का कारोबार ठप पड़ा है. चिकसौरा बाजार की हथियार मंडी पटना से काफी करीब है.
इसलिए यहां के बने हथियार पटना सहित सूबे के दूसरे जिलों को भी निर्यात किये जाते हैं.
हथियारों की बरामदगी को लेकर नालंदा पुलिस ने एक खास विंग तैयार कर रखा है. जिला खुफिया इकाई विशेष तौर पर काम कर रही है. नालंदा पुलिस गत एक वर्ष में करीब पचास से अधिक अवैध हथियार व दर्जनों गोलियां बरामद कर चुकी है. पुलिस चिकसौरा व वैसे स्थानों पर विशेष नजर रख रही है, जहां से हथियारों की तस्करी की गुंजाइश दिखती है.
कुमार आशीष, एसपी, नालंदा
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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