राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रचार-प्रसार कर मिलेगा स्टूडेंट एंबेस्डर का टैग

Updated at : 07 May 2024 1:01 AM (IST)
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रचार-प्रसार कर मिलेगा स्टूडेंट एंबेस्डर का टैग

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रचार-प्रसार कर मिलेगा स्टूडेंट एंबेस्डर का टैग

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:: उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किये गये परिवर्तन व शैक्षणिक सुधारों के लिए किये जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा करेंगे छात्र-छात्राएं

:: स्टूडेंट एंबेस्डर को यूजीसी न्यूजलेटर में आर्टिकल प्रकाशित करने का मिल सकता मौका

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किये गये बदलाव और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रचार-प्रसार का जिम्मा अब छात्र-छात्राएं को सौंपा जाएगा. इसको लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से नेप सारथी अभियान की शुरुआत की गई है. उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनारत मेधावी छात्र-छात्राएं नेप सारथी बन सकते हैं. इसमें चयनित होने वाले छात्र-छात्राओं को कई प्रकार का लाभ भी दिया जाएगा. यूजीसी की ओर से विश्वविद्यालय को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि नेप सारथी के लिए चयनित होने वाले छात्र-छात्राओ को यूजीसी की ओर से नेप सारथी का प्रमाणपत्र दिया जाएगा. यूजीसी अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल से सारथी को मेंशन करेगी. यूजीसी की ओर से आयोजित होने वाले सभी प्रकार के ऑनलाइन इवेंट्स में शामिल होने का मौका मिलेगा. साथ ही यूजीसी की ओर से जारी होने वाले न्यूजलेटर में अपने आर्टिकल को प्रकाशित करने का मौका मिलेगा. इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. जून तक डेडलाइन निर्धारित किया गया है. जुलाई में नेप सारथी के लिए चयनित अभ्यर्थियों का नाम घोषित किया जाएगा. साथ ही जुलाई से इनका ओरिएंटेशन शुरू होगा.

इस प्रकार करना होगा आवेदन

नेप सारथी के लिए आवेदन करने वाले छात्र-छात्राओं को यह बताना होगा कि वे क्यों नेप सारथी या स्टूडेंट एंबेस्डर बनना चाहते हैं. विश्वविद्यालय अधिकतम तीन छात्रों के नाम का प्रस्ताव यूजीसी को भेजेगा. सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, स्नातक और पीजी कोर्स में अध्ययनरत कोई भी छात्र आवेदन के योग्य हो सकते हैं.

नेप सारथी को दी जाएगी यह जिम्मेवारी

नेप सारथी के रूप में चयनित होने वाले अभ्यर्थियों को एंबेस्डर के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रमोट करना होगा. जागरूकता अभियान, सोशल मीडिया पर पोस्ट से लेकर छात्र-छात्राओं से फीडबैक लेकर विश्वविद्यालय के माध्यम से यूजीसी को भेजना होगा. छात्र-छात्राओं को यह जानकारी देनी होगी कि यह नीति उनके लिए फायदेमंद है.

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