:: राजस्व वसूली कैंप में तैनात तहसीलदारों में भारी आक्रोश
:: पिछले शनिवार लिट्टी न मिलने पर हुआ था विवाद
वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर
नगर निगम के कारनामे भी निराले हैं. यहां समस्या का समाधान ढूंढने के बजाय समस्या की जड़ को ही उखाड़ फेंकने की परंपरा चल पड़ी है. ताजा मामला शनिवार को लगने वाले विशेष राजस्व वसूली कैंप (ओटीएस) से जुड़ा है. पिछले शनिवार नाश्ते के पैकेट से लिट्टी क्या गायब हुई, निगम प्रशासन ने इस शनिवार को नाश्ते का पूरा मेनू ही गायब कर दिया. दरअसल, शहरवासियों को टैक्स में राहत देने के लिए हर शनिवार अंचल कार्यालयों में विशेष कैंप लगाया जाता है. इसमें तैनात कर्मचारियों और तहसीलदारों के लिए नाश्ते की व्यवस्था रहती है. पिछले शनिवार को नाश्ते के पैकेट में लिट्टी नहीं होने पर एक तहसीलदार का पारा चढ़ गया और उन्होंने बीते गुरुवार को इस मुद्दे पर जमकर हंगामा कर दिया. मामला अधिकारियों के कान तक पहुंचा, तो उन्होंने इसे सुलझाने के बजाय नाश्ते के बजट पर ही कैंची चला दी.इधर समिति की बैठक, उधर ””खाली पेट”” तहसीलदार
शनिवार को एक तरफ नगर निगम मुख्यालय में सशक्त स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक चल रही थी, तो दूसरी तरफ कैंपों में तैनात कर्मचारी ””चाय-पानी”” को तरसते दिखे. नाश्ता बंद होने से तहसीलदारों और कर्मियों में भारी आक्रोश है. दबी जुबान में कर्मचारियों ने कहा कि एक कर्मचारी के विरोध की सजा पूरे सिस्टम को देना कहां का न्याय है. हालांकि, निगम की सख्ती के डर से कोई भी खुलकर सामने नहीं आ रहा है.भ्रष्टाचार की ””मलाई”” पर सन्नाटा, लिट्टी पर ””एक्शन””
चर्चा है कि निगम में बड़े-बड़े घपलों पर तो पर्दा पड़ा रहता है, लेकिन एक अदद लिट्टी के लिए कर्मचारियों का हक छीन लेना चर्चा का विषय बना हुआ. अब सवाल यह उठ रहा है कि जो तहसीलदार और कर्मचारी खाली पेट फील्ड में पसीना बहा रहे हैं, क्या वे उसी उत्साह से निगम का खजाना भर पायेंगे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

