नगर निगम अब नहीं तय करेगा सफाई कर्मियों के लिए आउटसोर्सिंग रेट, विभाग ने जारी किया मॉडल आरएफपी

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नगर निगम अब नहीं तय करेगा सफाई कर्मियों के लिए आउटसोर्सिंग रेट, विभाग ने जारी किया मॉडल आरएफपी

The department has issued a model RFP

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::: सफाई कर्मियों की बहाली में होगी पारदर्शिता, जनसंख्या, घरों की संख्या और सड़क की लंबाई के आधार पर तय होगा मानव बल

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

मुजफ्फरपुर नगर निगम सहित बिहार के अन्य नगर निकायों में अब आउटसोर्सिंग एजेंसियों के चयन और सफाई कर्मियों के रेट तय करने में अधिकारियों की मनमानी नहीं चलेगी. नगर विकास एवं आवास विभाग ने नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारियों की शक्तियों में कटौती करते हुए एक मॉडल रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी कर दिया है. इसके तहत सफाई कर्मियों की बहाली के लिए अब सभी निविदाएं (टेंडर) विभागीय स्तर पर तय किये गये मानक पात्रता, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन के मापदंड और अनुबंध की शर्तों पर ही आधारित होंगी. इस कदम से चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता आने और गुणवत्तापूर्ण सेवा सुनिश्चित होने की उम्मीद है. नगर निकायों को यह पूरी प्रक्रिया अगले तीन महीने के भीतर हर हाल में पूरी करनी होगी, ताकि अगले वित्तीय वर्ष से नये मॉडल के आधार पर ही कार्य हो सके.

जनसंख्या एवं होल्डिंग की संख्या के आधार पर कर्मियों की बहाली

विभाग से जारी यह मॉडल आरएफपी आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन की प्रक्रिया में एकरूपता लाने के लिए एक बड़ा कदम है. अब तक अलग-अलग नगर निकाय अपने हिसाब से पात्रता के मानक और वित्तीय दरें तय करते थे, जिससे अक्सर विवाद या अनियमितता की शिकायतें सामने आती थीं. नये मॉडल आरएफपी के लागू होने के बाद, नगर निगम और अन्य नगर निकायों को अपने क्षेत्र की जनसंख्या, घरों (हाउस होल्ड) की संख्या, प्रधान सड़कों और मुख्य सड़कों की लंबाई का विस्तृत आकलन करना होगा. इसी आकलन के आधार पर, सफाई कार्य के लिए आवश्यक मानव बल (सफाई कर्मियों) की संख्या निर्धारित कर निविदा प्रकाशित की जायेगी.

तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन का मानक तय

मॉडल आरएफपी में आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन के लिए तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन के मानक भी कठोर किये गये हैं. अब केवल कम दर की बोली लगाने वाली एजेंसी ही नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से मजबूत, अनुभवी और विभाग द्वारा तय किए गए पात्रता मानदंडों पर खरी उतरने वाली एजेंसियों को ही मौका मिलेगा. अनुबंध की शर्तें भी अब मनमाने ढंग से नहीं बनाई जा सकेंगी, जिससे सफाई कर्मियों को उचित वेतन और कार्य की बेहतर स्थितियां मिल सकेंगी, साथ ही नगर निकाय की जवाबदेही भी बढ़ेगी.

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देवेश कुमार

लेखक के बारे में

By देवेश कुमार

पत्रकारिता के क्षेत्र में देवेश को 17 वर्षों का अनुभव है. उच्च शिक्षा, जमीन रजिस्ट्री, नगर निगम की कार्यप्रणाली और स्मार्ट सिटी विकास जैसे विषयों पर इनका विशेष लेखन है. राजनीतिक और सामाजिक समसामयिक मुद्दों के साथ-साथ खोजी पत्रकारिता और ब्रेकिंग न्यूज कवरेज में ये सक्रिय हैं. तथ्यपरक, प्रभावी और जन सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग इनकी प्रमुख पहचान है.

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