सदर अस्पताल से पीएचसी तक सीसीटीवी से होगी इलाज और ओपीडी की सीधी निगरानी कुमार दीपू , मुजफ्फरपुर मॉडल अस्पताल, एमसीएच से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) तक अब डॉक्टरों की ओपीडी में मौजूदगी और मरीजों को मिल रही इलाज की सुविधा पर सीधी नजर रखी जाएगी. चिकित्सक कब आए और कब गए, इसकी निगरानी अब सीसीटीवी कैमरों से होगी. सरकार ने सदर और अनुमंडलीय अस्पतालों में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों को 24 घंटे चालू रखने का सख्त निर्देश दिया है. कैमरे बंद पाए जाने पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग प्रभावित होगी, जिसे लेकर स्वास्थ्य मुख्यालय ने गंभीरता दिखाई है. 24 घंटे चालू रहेंगे सभी सीसीटीवी कैमरे स्वास्थ्य मुख्यालय ने सिविल सर्जन डॉ. अजय कुमार और सदर अस्पताल के अधीक्षक बाबू साहब झा को निर्देश दिया है कि अस्पताल परिसरों में लगे सभी कैमरे लगातार चालू रहें. किसी भी स्थिति में कैमरे बंद न हों, इसकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है. कैमरे बंद रहने पर इलाज और व्यवस्था की ऑनलाइन निगरानी संभव नहीं हो पाएगी. डॉक्टर चैंबर से लेकर अस्पताल परिसर तक निगरानी अब सीसीटीवी कैमरों को डॉक्टर चैंबर के साथ-साथ अस्पताल परिसर में लगे डिस्प्ले डिवाइस से जोड़ा गया है. इससे ओपीडी, इलाज की प्रक्रिया और मरीजों की गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखी जा सकेगी. वहीं, जिन जिला और अनुमंडल अस्पतालों में अब तक ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था नहीं थी, वहां भी चरणबद्ध तरीके से सीसीटीवी लगाए जा रहे हैं. डिजिटल हेल्थ योजना से सेवाएं होंगी पारदर्शी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना के तहत भव्या (बिहार हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट योजना) लागू की गई है. इसके अंतर्गत ओपीडी रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन कंसलटेंसी, दवा, रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी, दवा वितरण और आईपीडी सेवाओं को डिजिटल किया गया है. सीसीटीवी के माध्यम से इन सेवाओं की निगरानी कर कमियों को चिन्हित किया जाएगा और आवश्यक सुधार किए जाएंगे. 38 जिला अस्पतालों में लगाए गए 48 कैमरे विभागीय निर्णय के अनुसार राज्य के 38 जिला अस्पतालों में 48 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. इन कैमरों से न सिर्फ डॉक्टरों और कर्मियों की उपस्थिति, बल्कि अस्पताल आने वाले लोगों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी. बयान “सभी कैमरे लगा दिए गए हैं. यह सुनिश्चित किया गया है कि वे बंद न हों, इसके लिए जनरेटर से भी व्यवस्था की गई है. सभी 12 ओपीडी के सामने कैमरे लगाए गए हैं, जिससे हर गतिविधि की निगरानी हो सके. ऑनलाइन मॉनिटरिंग के साथ अब मरीजों को मिलने वाली इलाज की सुविधा पर भी सीधी नजर रखी जाएगी.” — बाबू साहब झा, अधीक्षक, सदर अस्पताल
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