Muzaffarpur News: रक्सौल बॉर्डर पार कर नेपाल में सप्लाई होता था ड्रग्स सिंडिकेट का 'ट्रिपल इंजेक्शन कॉकटेल, जेन जी में है भारी डिमांड

Published by : SUMIT KUMAR Updated At : 12 Jun 2026 10:05 PM

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नेपाल में सप्लाई होता था ड्रग्स

Muzaffarpur News: बिहार के मुजफ्फरपुर में पुलिस ने 6300 नशीले इंजेक्शनों के साथ चार अंतरराष्ट्रीय तस्करों को गिरफ्तार किया है. पटना से रक्सौल के रास्ते नेपाल भेजी जा रही इस 'कॉकटेल ड्रग्स' की आज के युवाओं में भारी डिमांड है.पढ़ें पूरी खबर..

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Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर जिला के सदर थाना क्षेत्र के न्यू बाइपास मधुबनी फोरलेन स्थित मादापुर चौबे गांव के समीप 6300 पीस नशीले इंजेक्शन के साथ पकड़े गए चारों तस्करों से पूछताछ पूरी हो गयी है. चारों तस्करों की पहचान पूर्वी चंपारण जिला के हरसिद्धि थाना के पकड़िया गांव निवासी आजाद अंसारी, हरसिद्धि थाना के के ही भादा पासी टोला निवासी चुमन राम, रक्सौल थाना के वार्ड – 20 निवासी मो. सलीम और रक्सौल थाना के वार्ड नंबर – 20 निवासी सोनू कुमार उर्फ राहुल के रूप में किया गया है. उनके खिलाफ सदर थाने में जिला औषधि निरीक्षक मो. परवेज अख्तर के बयान पर थाने में एनडीपीएस एक्ट में प्राथमिकी दर्ज की गयी है. बरामद 6300 इंजेक्शन में बुप्रेनोरफिन , फेनार्गन और डायजेपाम शामिल है. ड्रग इंस्पेक्टर ने तीनों इंजेक्शन के कुछ सैंपल को एफएसएल के लैब में जांच कराने की बात कही है.

पटना के नाला रोड से इंजेक्शन की खेप ला रहे थे

सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने बताया कि मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो पटना की सूचना पर सदर थाने की पुलिस ने ड्रग इंस्पेक्टर के नेतृत्व में छापेमारी करके यह नशीले इंजेक्शन की खेप पकड़ीहै. तस्कर पटना के नाला रोड से इंजेक्शन की खेप ला रहे थे. इसको रक्सौल बॉर्डर ले जाते . वहां से पांच से छह गुना अधिक कीमत पर सप्लाई किया जाता. चारों तस्कर से विस्तृत पूछताछ की जा रही है.

मो. सलीम है गिरोह का सरगना, चार बार पहले ले जा चुका है खेप

पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस के सामने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. मो. सलीम गिरोह का सरगना है. तस्करों ने बताया है कि वे पटना के नाला रोड स्थित बड़े दवा तस्कर हरि जी के इशारे पर काम कर रहे थे. वे लोग पूर्व में चार बार पहले भी नशीले इंजेक्शन की खेप तस्करी करके रक्सौल से नेपाल बॉर्डर पार करके नेपाल के स्थानीय डीलरों को सौंपा था.

एक खेप पहुंचाने पर 10 से 50 हजार तक मिलता है कमीशन

मो. सलीम ने पुलिस को बताया कि रक्सौल तक चारों तस्कर उसके साथ जाते हैं. फिर, वह डंकी रूट से नेपाल के अंदर पहुंच कर इंजेक्शन की खेप लोकल डीलर को सौंप देते हैं. इसके एवज में 10 से 50 हजार तक उसके सिंडिकेट को कमीशन मिलता है. जो बोलेरो चला रहा था उसको 10 हजार दिया जाता. उन्होंने बताया कि यह नशीला इंजेक्शन पटना में महज 50 से 60 रुपये में आसानी से मिल जाता है. इसी इंजेक्शन को जब नेपाल के बाजारों तक पहुंचाया जाता है, तो इसकी कीमत 250 से 300 रुपये तक हो जाती है.

पुलिस चारों ड्रग्स तस्कर के मोबाइल की कर रही जांच

सिटी एसपी का कहना है कि चारों तस्कर ने पूछताछ के दौरान कई जानकारियां दी है. पुलिस पूरे सिंडिकेट को खंगाल रही है. गिरफ्तार चारों के मोबाइल का कॉल डिटेल्स व गैलरी खंगाली जा रही है. इसके अलावा उनके सोशल मीडिया चैट की भी जांच की जा रही है.

तीनों इंजेक्शन का यह है प्रयोग

  • 1. बुप्रेनोरफिन इंजेक्शन यह क्या है: यह एक बेहद शक्तिशाली ओपिओइड श्रेणी की दवा है. चिकित्सा क्षेत्र में इसका उपयोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के असहनीय दर्द को कम करने या ऑपरेशन के बाद मरीज को राहत देने के लिए किया जाता है.तस्करी और दुरुपयोग की वजह: यह सीधे तौर पर अफीम, मार्फिन और हेरोइन (स्मैक) के परिवार से आती है. जब नशेड़ी इसे नसों के जरिए लेते हैं, तो यह हेरोइन जैसा ही तीव्र नशा देती है. अवैध बाजार में यह हेरोइन के एक सस्ते और आसानी से छिपने वाले विकल्प के रूप में सप्लाई की जाती है.कानूनीस्थिति: यह भारत में एनडीपीएस (नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) एक्ट के तहत कड़ाई से नियंत्रित है. बिना वैध लाइसेंस और डॉक्टर के विशेष पर्चे के इसे रखना या बेचना एक गंभीर गैर-जमानती अपराध है.
  • 2. फेनेर्गनइंजेक्शनयह क्या है: तकनीकी रूप से यह एक एंटी-हिस्टामाइन यानी एंटी-एलर्जिक दवा है. इसका वास्तविक उपयोग गंभीर एलर्जी, सफर के दौरान होने वाली उल्टी को रोकने या मरीज को सुलाने के लिए किया जाता है.तस्करी और दुरुपयोग की वजह: अकेले इस इंजेक्शन से कोई बड़ा नशा नहीं होता. लेकिन ड्रग माफिया इसे बूस्टर के रूप में इस्तेमाल करते हैं. जब इसे बुप्रेनोरफिन के साथ मिलाया जाता है, तो यह उस नशीली दवा के असर को तीन से चार गुना बढ़ा देती है और नशे की अवधि को लंबा कर देती है.कानूनीस्थिति: यह शेड्यूल एच ड्रग के तहत आती है, जिसे रिटेल में बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं बेचा जा सकता.
  • 3. डायजेपाम इंजेक्शन यह क्या है: यह बेंजोडायजेपाइन वर्ग की एक सेडेटिव यानी ट्रैंक्विलाइज़र (दिमाग को शांत करने वाली) दवा है. डॉक्टरों द्वारा इसका इस्तेमाल अत्यधिक मानसिक तनाव, पैनिक अटैक, अनिद्रा या मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है.तस्करी और दुरुपयोग की वजह: यह इंजेक्शन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को सुस्त कर देता है. कॉकटेल में इसे मिलाने से शरीर पूरी तरह शिथिल (सुन्न) हो जाता है, जिससे नशेड़ियों को ””परमशांति”” या अत्यधिक सुस्ती का अहसास होता है.कानूनीस्थिति: यह भी शेड्यूल एच 1 के तहत अत्यधिक प्रतिबंधित है. इसका स्टॉक रखने और बेचने का पूरा रिकॉर्ड दवा विक्रेताओं को रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होता है.
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SUMIT KUMAR

लेखक के बारे में

By SUMIT KUMAR

सुमित पत्रकारिता में पिछले 4 वर्षों से सक्रिय। प्रभात खबर के प्रिंट मीडिया के साथ काम करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम से जुड़े हुए हैं। क्राइम, हाईपरलोकल, स्वास्थ्य विभाग व राजनीतिक रिपोर्टिंग में विशेष रुचि और अनुभव रखते हैं। क्षेत्रीय मुद्दों और जनसरोकार की खबरों को सशक्त तरीके से उठाने के लिए जाने जाते हैं।

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