डार्क वेब, लालच और 'डिजिटल जेल': युवाओं को 'साइबर स्लेव' बना रहा अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट
डार्क वेब, लालच और 'डिजिटल जेल': उत्तर युवाओं को 'साइबर स्लेव' बना रहा अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट
विदेश में नौकरी के नाम पर मुजफ्फरपुर के युवाओं को साइबर स्लेव बनाया जा रहा है। फर्जी एजेंटों से सावधान रहें और जानें कैसे ठगों का यह गिरोह काम करता है।
Cyber Slave Gang: डॉलर और दिरहम की चमक... महीने का लाखों रुपये का पैकेज... और विदेश में लग्जरी लाइफ का सपना! लेकिन इस हसीन सपने के पीछे छुपा है एक खौफनाक और डार्क सच. मुजफ्फरपुर समेत पूरे उत्तर बिहार के मासूम और बेरोजगार युवाओं को अंतरराष्ट्रीय ठगों के एक खौफनाक सिंडिकेट ने अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया है. यह कोई साधारण विदेश भेजने वाला रैकेट नहीं, बल्कि युवाओं को डिजिटल दुनिया का बंधक यानी 'साइबर स्लेव' (डिजिटल गुलाम) बनाने वाला एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय क्रिमिनल नेटवर्क है.
फ्री वीजा का दांव और एयरोड्रोम से सीधे 'अज्ञात लोकेशन'
फेसबुक, वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर तैरते विज्ञापन "कंबोडिया और दुबई में डेटा एंट्री ऑपरेटर की अर्जेंट जरूरत" इस खौफनाक खेल का पहला मोहरा हैं. मुजफ्फरपुर के ग्रामीण इलाकों में सक्रिय लोकल एजेंट्स युवाओं को बिना किसी खास योग्यता के 80 हजार से 1.5 लाख रुपये महीने का लालच देकर फंसाते हैं. पासपोर्ट बनते ही उन्हें टूरिस्ट वीजा पर कंबोडिया, म्यांमार या इंडोनेशिया भेज दिया जाता है. लेकिन जैसे ही युवा वहां की जमीन पर कदम रखते हैं, उनका सामना किसी ड्रीम जॉब से नहीं, बल्कि बंदूक की नोक पर खड़े नकाबपोश अपराधियों से होता है. एयरपोर्ट से ही उनके पासपोर्ट, पैसे और मोबाइल छीन लिए जाते हैं.
गनपॉइंट, इलेक्ट्रिक शॉक और 'डिजिटल टॉर्चर'
घने जंगलों के बीच बने कड़े पहरे वाले परिसरों में इन युवाओं को चौबीसों घंटे कंप्यूटर के सामने बैठा दिया जाता है. गनपॉइंट पर उनसे भारत के सीधे-साधे लोगों को ठगने का काम कराया जाता है:
- क्रिप्टो और लोन ऐप फ्रॉड: फर्जी बैंक खातों और टास्क-बेस्ड ऑनलाइन ठगी के जरिए रोजाना लाखों के फ्रॉड का दबाव.
- अमानवीय यातनाएं: मना करने पर करंट के झटके, हफ्तों तक भूखा रखना और शरीर के अंग बेचने की धमकियां.
- डिजिटल जेल: सुरक्षा इतनी सख्त कि परिंदा भी पर न मार सके; सिवान और गोपालगंज के कई युवा आज भी वहां से छूटने के लिए तड़प रहे हैं.
साइबर एक्सपर्ट की चेतावनी: भूलकर भी न करें यह गलती
मुजफ्फरपुर के साइबर एक्सपर्ट अनिकेत पीयूष और स्थानीय पुलिस के अनुसार:
- टूरिस्ट वीजा का सच: कोई भी वैध कंपनी काम (वर्क परमिट) के लिए टूरिस्ट वीजा पर विदेश नहीं बुलाती.
- फर्जी कंसल्टेंसी से सावधान: सरकारी पोर्टल पर पंजीकृत एजेंट के माध्यम से ही प्रक्रिया पूरी करें.
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