'मेरी बेटी मिलेगी भी या नहीं?' खुशी अपहरण कांड में CBI जांच से निराश पिता ने दी हाईकोर्ट जाने की चेतावनी

Author Chandan|Edited by Aaruni Thakur
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रोती मां और खुशी की फाइल फोटो

रोती मां और खुशी की फाइल फोटो

खुशी अपहरण मामले में CBI की जांच पर पीड़ित परिवार ने नाराजगी जताई है. पिता राजन साह का कहना है कि ब्रेन मैपिंग के बाद भी जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है. यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो परिवार एक बार फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा.

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Khushi Kidnapping Case: चर्चित खुशी अपहरण कांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच को लेकर पीड़ित परिवार ने नाराजगी जताई है. पीड़िता के पिता राजन साह का कहना है कि उनकी ब्रेन मैपिंग के बाद जांच में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है. उन्होंने आशंका जताई कि यदि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे एक बार फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.

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जांच अधिकारी ने साझा की प्रगति, परिवार नहीं हुआ संतुष्ट

हाल ही में मामले के अनुसंधान अधिकारी (आईओ) गौरव मिश्रा राजन साह के घर पहुंचे और अब तक की जांच की जानकारी दी.

हालांकि, राजन साह ने कहा कि जांच की मौजूदा स्थिति से उनका परिवार संतुष्ट नहीं है. उनका कहना है कि जब मामला CBI को सौंपा गया था, तब उन्हें उम्मीद थी कि एजेंसी उनकी बेटी का पता लगाएगी, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है.

संदिग्धों की जांच नहीं होने का आरोप

राजन साह ने दावा किया कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया और अपना ब्रेन मैपिंग टेस्ट भी कराया.

उनका आरोप है कि जिन संदिग्धों के नाम उन्होंने जांच एजेंसी को बताए, उनकी अब तक ब्रेन मैपिंग या अन्य वैज्ञानिक जांच नहीं कराई गई है. उन्होंने कहा कि इससे उन्हें जांच की दिशा को लेकर चिंता हो रही है.

चार्जशीट दाखिल कर केस बंद करने की आशंका

राजन साह ने आशंका जताई कि कहीं CBI जेल में बंद आरोपी अमन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर मामले को जल्दबाजी में बंद न कर दे.

उन्होंने कहा कि यदि जांच अधूरी रहते हुए ऐसा किया गया, तो वे न्याय के लिए दोबारा हाईकोर्ट जाएंगे.

ब्रेन मैपिंग कराई, लेकिन नार्को टेस्ट से किया इनकार

राजन साह ने बताया कि करीब दो महीने पहले कोर्ट के आदेश पर अहमदाबाद स्थित डायरेक्टोरेट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में उनका ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराया गया था.

उन्होंने कहा कि नार्को टेस्ट से पहले उन्हें एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने को कहा गया, जिसमें संभावित स्वास्थ्य जोखिमों का उल्लेख था. परिवार से विचार-विमर्श के बाद उन्होंने नार्को टेस्ट कराने से इनकार कर दिया.

राजन साह के अनुसार, उन्होंने यह फैसला अपने परिवार और छोटे बच्चों की जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए लिया.

जांच को लेकर बनी हुई है प्रतीक्षा

फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले में CBI की जांच जारी है. पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि जांच एजेंसी सभी पहलुओं की गहन जांच कर मामले की सच्चाई सामने लाएगी.

नोट: इस खबर में व्यक्त आरोप और आशंकाएं पीड़ित परिवार के बयान पर आधारित हैं. CBI की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है.

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