अपने "स्व " की तलाश " में स्वयं को खोते जा रहे हैं
Published by : ANKIT Updated At : 28 Aug 2025 7:57 PM
In the search of our "self " we are losing ourselves
दीपक 15, 16
मनोविज्ञान विभाग की अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस शुरू, तीन दिनों तक होगा आयोजनएमजीएएचवी के पूर्व वीसी प्रो गिरीश्वर मिश्र व बीएचयू के प्रो तुषार का व्याख्यान
वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुरप्रोफेसर गिरीश्वर मिश्र ने कहा-पश्चिम वाले अपने “स्व ” की तलाश ” में स्वयं को खोते जा रहे हैं. वहीं भारतीय ज्ञान दर्शन में अहम् ब्रह्मास्मि के तत्त्व पहले से ही समावेशित हैं. डॉ तुषार सिंह ने बताया कि हर साल प्रयागराज में लगने वाले माघ मेले में लाखों की भीड़ जुटने के बावजूद लोग स्वयं को अनुशासित कर अपने मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ रख पाते हैं. बीआरएबीयू के मनोविज्ञान विभाग में तीन दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस की शुरुआत हुई. मुख्य अतिथि सह मुख्य वक्ता महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो गिरीश्वर व विशिष्ट अतिथि बीएचयू के प्रो तुषार सिंह, बीआरएबीयू के कुलपति प्रो दिनेश चंद्र राय व संयोजक प्रो रजनीश गुप्ता ने संयुक्त रूप से इसका उद्घाटन किया. विवि के कुलगीत के बाद विभागाध्यक्ष प्रो रजनीश ने अतिथियों का स्वागत किया.विवि में मनोविज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ विकास कुमार की तीन किताबों का विमोचन भी हुआ. डॉ रेखा श्रीवास्तव की पुस्तक संचार के रंग व्यक्तित्व के ढंग काे भी विमोचित किया गया. धन्यवाद ज्ञापन डॉ आभा रानी सिन्हा ने किया. मौके पर डॉ विकास, डॉ तूलिका सिंह, डॉ सुनीता, अर्चना सिंह, डॉ सारिका चौरसिया, डॉ रेखा श्रीवास्तव, डॉ पयोली, विवि के पदाधिकारी, संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, दूरस्थ शिक्षा के उपनिदेशक डॉ कांतेश, डॉ ललित किशोर, डॉ सतीश, डॉ रत्नेश मिश्रा, आनंद, पवन, कृष्ण, रोशनी, शिवानी, आदित्य, पीएचडी शोधार्थी गुंजा, अपूर्वा, पूर्णिमा, पंकज, रमन, रौनक, सोनाली मिश्रा समेत अन्य मौजूद थे.
कुलगीत के लिए 25 हजार का पुरस्कार
विवि कुलगीत के रचयिता हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ राकेश रंजन व कुलगीत को संगीतबद्ध करने वाले डॉ राकेश मिश्र को कुलपति ने 25 हजार का चेक देकर पुरस्कृत किया. दो सत्रों में शोध पत्रों की प्रस्तुति हुई. शोध छात्रों ने पेपर-आलेख अंतर सांस्कृतिक संबंध व देशज मनोविज्ञान, मनोविज्ञान एवं पब्लिक लाइफ, वातावरण व सामुदायिक मनोविज्ञान जैसे विषयों पर प्रस्तुत किया. अध्यक्षता एमडीडीएम कॉलेज की प्राचार्य प्रो अलका जायसवाल ने की. वहीं इस दौरान डॉ अंकिता सिंह, डॉ वीणा, डॉ सुबालाल पासवान ने भी भूमिका निभायी.
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