कौन हैं डॉ गोपाल जी त्रिवेदी? कुलपति की कुर्सी छोड़ी, गांव की मिट्टी से पद्मश्री निकाला

Edited by Paritosh Shahi
Updated:
विज्ञापन

डॉ गोपाल जी त्रिवेदी

Padma Shri: मुजफ्फरपुर के डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया है. पूसा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति रहे 95 वर्षीय डॉ. त्रिवेदी ने रिटायरमेंट के बाद गांव को अपनी कर्मभूमि बनाया और मत्स्य पालन और आधुनिक खेती के जरिए किसानों की आय बढ़ाने का मॉडल पेश किया.

विज्ञापन

Padma Shri: मुजफ्फरपुर जिले के डॉ गोपाल जी त्रिवेदी को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा. विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए उन्हें पद्मश्री मिला है. बताया जाता है कि समेकित मत्स्य फार्मिंग का मॉडल पेश करना उनकी प्रमुख योजनाओं में से एक है.

15 जनवरी 1930 को मतलुपुर गांव में जन्में डॉ गोपालजी त्रिवेदी की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही विद्यालय में हुई. हाइस्कूल की पढ़ाई उन्होंने पूसा हाइस्कूल से पूरी की. एलएस कॉलेज से इंटर करने के बाद उन्होंने बीएससी ऑनर्स में दाखिला लिया, लेकिन इसी दौरान पिता के निधन के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उनकी पढ़ाई बीच में ही रुक गयी. कम उम्र में इकलौते पुत्र होने के कारण उन्हें गांव लौटना पड़ा और खेती को ही जीवन का आधार बनाना पड़ा.

मां को हर उपलब्धि का दिया श्रेय

डॉ त्रिवेदी अपने जीवन की हर उपलब्धि का श्रेय अपनी मां को देते हैं. वह बताते हैं कि उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय पूसा से बैचलर व मास्टर डिग्री हासिल की. सरकार ने उन्हें पीएचडी के लिए भेजा. इसके बाद वे ढोली कॉलेज में प्रोफेसर और जॉइंट डायरेक्टर बने, फिर विश्वविद्यालय में निदेशक और अंततः कुलपति तक का सफर तय किया. वह 1988 से 1991 तक डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कुलपति रहे.

बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें

रिटायरमेंट के बाद गांव को बनाया कर्मभूमि

डॉ गोपाल जी त्रिवेदी ने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने शहर नहीं, बल्कि अपने गांव को ही कर्मभूमि के रूप में चुना. यहां रहकर वे किसानों को आधुनिक व लाभकारी खेती की तकनीक से जोड़ते रहे. ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े होने के कारण किसानों से जुड़ाव कभी टूटा नहीं. 95 वर्ष की उम्र में भी वे किसानों को प्रेरित कर रहे हैं.

बेटे डॉ रमन कुमार त्रिवेदी ने बताया कि बाबूजी की सोच हमेशा किसान व उसकी आमदनी के इर्द-गिर्द रही है. किसान की आय कैसे बढ़े, यही उनका जीवन मंत्र है. वे केवल सलाहकार नहीं, बल्कि स्वयं मछली पालन, पौधारोपण व मक्के की खेती जैसे मॉडलों को अपनाकर उदाहरण पेश कर रहे हैं.

इसे भी पढ़ें: बिहार में लैंड रजिस्ट्री का नया नियम, अब बिना GIS वेरिफिकेशन के नहीं बिकेगी जमीन

विज्ञापन
Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन