वाटर टावर, पाइपलाइन और 100 घर बने रोड़ा
अखाड़ाघाट फोरलेन पुल के ””अलाइनमेंट”” में फंसा वाटर टावर, 100 घरों पर भी विस्थापन की तलवार
वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर
उत्तर बिहार की लाइफलाइन माने जाने वाले अखाड़ाघाट के समानांतर बन रहे पहले फोरलेन पुल के निर्माण में जमीन का बड़ा पेंच फंस गया है. पुल के अलाइनमेंट में नगर निगम का वाटर टावर और मुख्य पाइपलाइन आ जाने से परियोजना की रफ्तार थमने की आशंका गहरा गई है. इसके अलावा करीब 100 आवासीय घर भी निर्माण दायरे में आ रहे हैं, जिन्हें हटाए बिना आगे काम करना संभव नहीं दिख रहा.वाटर टावर शिफ्टिंग बनी सबसे बड़ी चुनौती
सोमवार को डीएम के निर्देश पर बिहार राज्य पुल निगम के डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर और नगर निगम की सहायक अभियंता ने स्थानीय पार्षद अमित कुमार की मौजूदगी में स्थल निरीक्षण किया. टीम ने वाटर टावर को शिफ्ट करने के लिए आसपास वैकल्पिक स्थल की तलाश की, लेकिन फिलहाल कोई उपयुक्त जगह नहीं मिल सकी. अधिकारियों के अनुसार नए वाटर टावर के लिए कम से कम 400 वर्ग फीट खाली जमीन की आवश्यकता है.100 परिवारों की बढ़ीं धड़कनें
पुल निर्माण के रास्ते में आ रहे करीब 100 आवासीय घरों को चिन्हित किया गया है. इन परिवारों के विस्थापन का मुद्दा प्रशासन के लिए संवेदनशील बन गया है. बिना पुनर्वास और मुआवजे की स्पष्ट योजना के घरों को हटाना आसान नहीं होगा, जिससे परियोजना में देरी की आशंका है.पाइपलाइन और विस्थापन तक अटका काम
अधिकारियों का मानना है कि जब तक वाटर टावर, मुख्य पाइपलाइन और प्रभावित घरों का विस्थापन नहीं हो जाता, तब तक पुल निर्माण कार्य की गति प्रभावित रहेगी. इससे शहर की बहुप्रतीक्षित फोरलेन कनेक्टिविटी पर भी असर पड़ सकता है.बयान
“निरीक्षण के दौरान पुल निर्माण से प्रभावित होने वाले इलाकों की जानकारी अधिकारियों को दी गई है. जनता की समस्याओं और विस्थापन से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लेने की जरूरत है, ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो.”— अमित कुमार, स्थानीय पार्षद
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