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– महावाणी स्मरण में हुई काव्य रचनाओं की बरसात संवाददाता, मुजफ्फरपुर आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री की स्मृति में मंगलवार को निराला निकेतन में आयोजित महावाणी स्मरण में काव्य रचनाआंे की बरसात हुई. आचार्य जी की रचनाओं ने जहां उनकी याद दिलायी, वहीं कई लोगों ने मौजूदा दौर को भी शब्दों में गूंथकर परोसा तो खूब […]

– महावाणी स्मरण में हुई काव्य रचनाओं की बरसात संवाददाता, मुजफ्फरपुर आचार्य जानकी बल्लभ शास्त्री की स्मृति में मंगलवार को निराला निकेतन में आयोजित महावाणी स्मरण में काव्य रचनाआंे की बरसात हुई. आचार्य जी की रचनाओं ने जहां उनकी याद दिलायी, वहीं कई लोगों ने मौजूदा दौर को भी शब्दों में गूंथकर परोसा तो खूब वाहवाही मिली. कार्यक्रम की शुरुआत बेला के संपादक डा. संजय पंकज ने आचार्य जी को नमन करके किया. उन्होंने कहा कि हिंदी गीत-कविता के शिखर पुरुष आचार्य जी के साहित्यिक अवदान से पूरा देश परिचित है. साहित्य के सभी विधाओं में एक समान अधिकार के साथ सृजन कर्म किया. डॉ विजय शंकर मिश्र ने आचार्य के ‘मेघगीत’ का पाठ किया- बादल के पंखों से उड़कर, सावन की श्याम परी आई. विष्णुकांत झा ने व्यर्थ गर्जन है काल तेरा यह, मैं तो तेरा अमृत पुत्र हूं कविता सुनाई. समय की चुनौती पर भवचंद्र पांडेय ने सुनाया- बढ़ रही है बात हद के पार अब कुछ कीजिए, जिंदगी अब हो गई दुश्वार अब कुछ कीजिए. ललन कुमार, अंजनी कुमार पाठक, मीनाक्षी मीनल, रंजना सरकार, नीरज नयन, असीम सिन्हा ने भी अपना रचनाएं सुनाईं. स्मरण में एचएल गुप्ता, ब्रज भूषण शर्मा, राम चंद्र सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे. धन्यवाद ज्ञापन जयमंगल मिश्र व संचालन डॉ विजय शंकर मिश्र ने किया.

Prabhat Khabar Digital Desk
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