मुजफ्फरपुर : बूढ़ी गंडक के किनारे बसे प्रखंडों में एइएस का प्रकोप अधिक

Updated at : 23 Feb 2020 9:30 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर : बूढ़ी गंडक के किनारे बसे प्रखंडों में एइएस का प्रकोप अधिक

मुजफ्फरपुर : बूढ़ी गंडक नदी के किनारे जो प्रखंड हैं, उनमें एइएस से सबसे अधिक बच्चे प्रभावित हो रहे हैं. पिछली बार जो भी बच्चे प्रभावित हुए हैं, उनमें कांटी, मीनापुर, मुशहरी, बोचहां और मोतीपुर शामिल हैं. इन क्षेत्र से 80 प्रतिशत बच्चे एइएस से पीड़ित हुए हैं. इस बार इन पांचों प्रखंडों पर निम्हांस […]

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मुजफ्फरपुर : बूढ़ी गंडक नदी के किनारे जो प्रखंड हैं, उनमें एइएस से सबसे अधिक बच्चे प्रभावित हो रहे हैं. पिछली बार जो भी बच्चे प्रभावित हुए हैं, उनमें कांटी, मीनापुर, मुशहरी, बोचहां और मोतीपुर शामिल हैं. इन क्षेत्र से 80 प्रतिशत बच्चे एइएस से पीड़ित हुए हैं. इस बार इन पांचों प्रखंडों पर निम्हांस की टीम नजर रखेगी. हर पीएचसी में दो बेड का पीआइसीयू बनाया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम मौजूद रहेगी.
बीमार बच्चों का प्रारंभिक इलाज पहले पीएचसी स्तर पर होगा. अगर बच्चे की स्थित नहीं संभलती है, तो उसे एसकेएमसीएच में रेफर किया जायेगा. ये बातें स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने रामदयालु स्थित एक होटल के सभागार में एइएस पर 11 जिलों के सिविल सर्जन व अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में कही. प्रधान सचिव ने कहा कि इस बार कागज पर नहीं, धरातल पर काम दिखेगा. एसकेएमसीएच में सौ बेड का पीआइसीयू के अलावा इस बार अलग से एइएस वार्ड भी बनाया जा रहा है.
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