तीस फीसदी हिस्सा सरकार का, उसे मत खाइए : वेणुपानी

Updated at : 11 Mar 2019 6:57 AM (IST)
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तीस फीसदी हिस्सा सरकार का, उसे मत खाइए : वेणुपानी

मुजफ्फरपुर : टैक्स के प्रति जागरूकता के लिए रविवार को आयकर विभाग की ओर से तिलक मैदान स्थित एक रेस्टोरेंट में सर्राफा कारोबारियों के साथ कार्यशाला आयोजित की गयी. मौके पर प्रधान आयकर अायुक्त डीएस वेणुपानी ने व्यवसायियों को उचित टैक्स जमा करने की अपील की. उन्होंने कहा कि सरकार व कारोबारी दोनों पार्टनर हैं. […]

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मुजफ्फरपुर : टैक्स के प्रति जागरूकता के लिए रविवार को आयकर विभाग की ओर से तिलक मैदान स्थित एक रेस्टोरेंट में सर्राफा कारोबारियों के साथ कार्यशाला आयोजित की गयी. मौके पर प्रधान आयकर अायुक्त डीएस वेणुपानी ने व्यवसायियों को उचित टैक्स जमा करने की अपील की.
उन्होंने कहा कि सरकार व कारोबारी दोनों पार्टनर हैं. एक का हिस्सा 70 फीसदी व दूसरे का 30 फीसदी है. आप अपने 70 फीसदी आय का कहीं भी उपयोग करें, यह आपकी मर्जी है. लेकिन, सरकार का हिस्सा मत खाइये. ऐसा करेंगे तो मन में हमेशा डर बन रहेगा. जब सरकार को पता चलेगा कि आप बेईमानी कर रहे हैं, तो पेनाल्टी के साथ जेल भी हो सकती है.
ऐसे वक्त में आपको अपने भी छोड़ देंगे. हम ईमानदारी से काम करें, तो सुख की नींद सो सकते हैं. आप अपनी ऊर्जा टैक्स कैसे कम करें, इसकी बजाय व्यापार बढ़ाने में लगाएं तो दोनों का फायदा होगा. आयकर विभाग आपके और सरकार के बीच का एक माध्यम है.
इससे डरने की जरूरत नहीं है. प्रधान आयकर आयुक्त ने कहा कि हम यह नहीं कहते कि सभी कारोबारी आय छुपाते हैं. लेकिन, कुछ ऐसे हैं, जो सही जानकारी नहीं देते. कार्यशाला का संचालन सुजीत चौधरी कर रहे थे. मौके पर होलसेल व खुदरा कारोबारी मौजूद थे.
बही-खाता नहीं हाेने की बात कहना ठीक नहीं : प्रधान आयकर आयुक्त ने कहा कि अब तक जो भी सर्वे हुए हैं, वहां कारोबारी अपना बही-खाता नहीं दिखाते. कहते हैं कि हमलोगों ने बनाया ही नहीं है. ऐसा कहने से वे बचते नहीं है, बल्कि उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं.
यह संभव ही नहीं कि आप कारोबार करें और आपके पास उसका हिसाब नहीं हो. कोई पांच लाख कैश लेकर खरीदारी करने आता है और कहता है कि उसे बिल नहीं चाहिए, तो आप ऐसी गलती न करें. एक दिन पहले शहर सहित सीवान के चार सर्राफा कारोबारियों के यहां सर्वे किया गया था. सभी ने अपना स्टॉक कम दिखाया था. यह ट्रेंड ठीक नहीं है.
इससे शंका और मजबूत होती है. जांच की कार्रवाई भी बढ़ जाती है. कारोबारियों को अपने कारोबार का हिसाब-किताब बिल्कुल ठीक रखना है.
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