मुजफ्फरपुर : पांच साल से होम्योपैथ की दवा नहीं एलोपैथी में रेफर करते हैं डॉक्टर
Author Prabhat khabar digital desk
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कुमार दीपू मुजफ्फरपुर : सदर अस्पताल में पिछले पांच सालों से होम्योपैथिक दवा नहीं है. वहीं आयुर्वेदिक की दस प्रकार की दवा उपलब्ध है. होम्योपैथ ओपीडी ���ें हर दिन करीब 30 से 40 मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं. डॉक्टर मरीज को देख तो लेते हैं, लेकिन दवा उपलब्ध नहीं होने की बात कह कर एलोपैथ […]
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कुमार दीपू
मुजफ्फरपुर : सदर अस्पताल में पिछले पांच सालों से होम्योपैथिक दवा नहीं है. वहीं आयुर्वेदिक की दस प्रकार की दवा उपलब्ध है. होम्योपैथ ओपीडी में हर दिन करीब 30 से 40 मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं. डॉक्टर मरीज को देख तो लेते हैं, लेकिन दवा उपलब्ध नहीं होने की बात कह कर एलोपैथ ओपीडी में रेफर कर देते हैं. होम्योपैथ डॉ पुष्पा कुमारी कहती हैं कि दवा के लिए कई बार मैंने सीएस को पत्र लिखा, लेकिन दवा उपलब्ध नहीं करायी गयी.
इधर, अस्पताल प्रशासन दवा की कमी का ठीकरा एसीएमओ पर फोड़ रहा है और एसीएमओ इसका जिम्मेदार अस्पताल प्रशासन को बता रहे हैं. इससे एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे आयुष ओपीडी में मीठी गोली और शीशी खरीदने की जिम्मेदारी किसकी है, इसको लेकर सवाल खड़ा हो गया है.
अंतिम बार 2012 में आयी थी दवा
वर्ष 2012 में होम्योपैथिक दवा आयी थी. यह दवा महज छह माह ही चला. डॉ पुष्पा कुमारी कहती हैं कि 2012 में उन्होंने अस्पताल में पदभार ग्रहण किया था.
इसके बाद दवा उपलब्ध करायीगयी थी. लेकिन, इसके बाद दवा के लिए उन्होंने कई बार पत्र लिखा. समीक्षा बैठक में भी इसके लिए आवाज उठायी, लेकिन दवा उपलब्ध नहीं हुई. दवा उपलब्ध नहीं होने से उन्हें मजबूरन एलोपैथी ओपीडी में रेफर करना पड़ता है. वर्ष 2012 में अस्पताल के होम्योपैथिक ओपीडी में मरीजों की संख्या 100 के पार रहती थी, लेकिन दवा संकट के कारण अब ओपीडी में मरीजों की संख्या काफी कम हो गयी है.
बोले मरीज : होम्योपैथिक ओपीडी में इलाज कराने आये मुशहरी के सुमित कुमार कहते हैं कि उन्होंने होम्योपैथी में इलाज कराने के लिए पुर्जा कटाया था. उन्हें परामर्श भी किया गया, लेकिन दवा देने के बजाय उन्हें एलोपैथी में रेफर कर दिया गया.
जब वे दवा काउंटर पर गये, तो उन्हें एलोपैथी में दिखा कर आने की बात कही गयी. जब वे एलोपैथी में दिखा कर आये, तो उन्हें काउंटर पर एलोपैथी दवा दी गयी.
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