मुजफ्फरपुर: नवरूणा कांड में सीबीआइ ने बुधवार को दारोगा अमित कुमार से पूछताछ की. केस के आइओ कुमार रौनक बुधवार दोपहर को उसे लेकर चक्रवर्ती लेन स्थित नवरूणा के घर पहुंचे. पांच साल पूर्व नवरुणा का अपहरण होने के बाद अमित को आइआे बनाया गया था. वह उस समय वह नगर थाने में तैनात थे. सीबीआइ ने दारोगा से पूर्व में किये गये अनुसंधान से जुड़े कई सवाल किये.
सीबीआइ उनसे यह जानना चाह रही थी कि नवरूणा के अपहरण के बाद मौके से नगर पुलिस ने क्या साक्ष्य एकत्र किये थे. नवरूणा के पिता अतुल्य व माता मैत्री चक्रवर्ती के समक्ष भी अमित से कई सवालों के उत्तर सीबीआइ जानना चाह रही थी. परिजनों ने कई बार अमित पर आरोप लगाया था कि नवरूणा के अपहरण में किसका हाथ है, वह सब कुछ जानता है. वह बार-बार बेटी के सुरक्षित होने का आश्वासन भी देता था. उसपर दिल्ली जाकर लॉ के छात्र अभिषेक रंजन को धमकाने का भी आरोप लगा था. पूर्व में भी सीबीआइ अमित से पूछताछ कर चुकी है. हालांकि, अपहरण के कुछ माह बाद ही तत्कालीन नगर थानाध्यक्ष जितेंद्र प्रसाद को आइओ बनाया गया था. सीबीआइ उनसे भी पूछताछ कर चुकी है. बता दें कि 2009 बैच के दारोगा अमित हाल तक मनियारी थानाध्यक्ष के पद पर तैनात थे. उनका तबादला मोतिहारी हाे चुका है.
जवाब नहीं मिलने पर होगा लाइ डिटेक्टर टेस्ट
सीबीआइ ने केस के पहले आइओ रहे अमित से पूछताछ के लिए प्रश्नों की सूची तैयार कर रखी है. वर्तमान में पश्चिमी चंपारण जिले में तैनात इंस्पेक्टर जितेंद्र प्रसाद की भी भूमिका की जांच कर रही है. अपहरण के कुछ माह बाद इन दोनों पुलिस अधिकारियों पर परिजनों ने पुलिस के एक वरीय अधिकारी के यहां ले जाकर धमकाने का आरोप लगाया था. पूछताछ में अहम खुलासा नहीं होने पर दोनों का लाइ डिटेक्टर टेस्ट के साथ नार्को भी सीबीआइ करा सकती है.
यह था मामला
18 सितंबर 2012 को जवाहर लाल रोड स्थित चक्रवर्ती लेन से खिड़की तोड़ कर नवरुणा का अपहरण कर लिया गया था. 26 नवंबर काे नवरुणा के घर के पास नाले में कंकाल मिला था. दो साल तक नगर पुलिस व सीआइडी ने जांच की. 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआइ को जांच की जिम्मेवारी दी गयी थी. डीएनए जांच से सीबीआइ ने नवरुणा का कंकाल होने की पुष्टि की थी. तीन साल में सीबीआइ को ठोस सुराग नहीं मिल पाया है. पांच सितंबर को सीबीआइ ने पार्षद राकेश कुमार सिन्हा पप्पू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.
