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वट सावित्री व्रत व सोमवती अमावस्या आज, बाजार में खरीदारी को भीड़

Updated at : 25 May 2025 6:27 PM (IST)
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वट सावित्री व्रत व सोमवती अमावस्या आज, बाजार में खरीदारी को भीड़

वट सावित्री व्रत व सोमवती अमावस्या आज, बाजार में खरीदारी को भीड़

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– फल व श्रृंगार के सामान की खरीदारी को लेकर देर शाम तक लगी महिलाओं की भीड़

प्रतिनिधि, मुंगेर

पति के सुख-शांति व दीर्धायु जीवन की कामना को लेकर सोमवार को सुहागिन महिलाएं नियम व निष्ठा के साथ सोमवार को बरगद पेड़ के नीचे वट सावित्री पूजा करेंगी. त्योहार को लेकर रविवार को शहर सहित ग्रामीण इलाकों में चहल-पहल रही. दोपहर बाद से पूजन सामग्री की खरीद के लिये बाजार में महिलाओं की भीड़ उमड़ने लगी. देर शाम तक विभिन्न प्रकार के मौसमी फल, बांस के पंखे, श्रृंगार वस्तु तथा अन्य पूजन सामग्रियों की जमकर बिक्री हुयी. वट सावित्री को करवाचौथ के समान ही माना जाता है. इस व्रत को संपन्न कर सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण बचाये थे. यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिये रखती है. इस व्रत के प्रताप से पति पर आए संकट दूर हो जाते हैं और दांपत्य जीवन में खुशियां आती है. इन दिन सावित्री और सत्यवान की कथा सुनने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.

वट सावित्री के साथ सोमवती अमावस्या का शुभ संयोग

इस बार वट सावित्री व्रत इसलिये खास है कि इसी दिन सोमवती अमावस्या का व्रत भी है. सोमवार को वट सावित्री पूजा सुबह 11 बजकर 51 मिनट से 3 बजे तक का मुहूर्त सबसे शुभ है. पंडित प्रमोद मिश्रा ने बताया कि अमावस्या तिथि की शुरुआत 26 मई को सुबह 12 बजकर 11 मिनट से होगी और अमावस्या तिथि का समापन 27 मई को सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर होगा. ऐसे में 26 मई को वट सावित्री व्रत की पूजा अभिजीत मुहूर्त में करना बेहद शुभ माना जाता है. सुबह 11 बजकर 51 मिनट से 3 बजे तक का मुहूर्त सबसे शुभ है.

वट वृक्ष की पूजा से अखंड सौभाग्यवती का मिलता है वरदान

वट वृक्ष में भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव का वास बताया जाता है. माना जाता है कि वट वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, इसके तने में विष्णु और ऊपरी भाग में भगवान शिव निवास करते हैं. वट वृक्ष की पूजा करने से शनि, मंगल, राहु के अशुभ प्रभाव दूर हो जाते हैं. वट पूजा से अखंड सौभाग्य और उन्नति की प्राप्ति होती है. यमराज और सावित्री के मध्य शास्त्रार्थ वट वृक्ष के नीचे हुआ था. इसी वृक्ष के नीचे पतिव्रता सावित्री को यमराज से न्याय की प्राप्ति हुयी थी. सभी पवित्र वृक्षों में वट वृक्ष की आयु अधिक होती है. इस व्रत में खंडित टहिनों का पूजन न करते हुये संपूर्ण वृक्ष का पूजन करना चाहिए. इस व्रत में महिलाएं नए वस्त्र धारण कर सोलह श्रृंगार करती है. वट सावित्री व्रत करने से जीवन-साथी पर आया कोई भी संकट टल जाता है, हिंदु धर्म में पति और संतान की प्राप्ति और उनकी सलामती के लिये कई व्रत रखे जाते हैं. वट सावित्री व्रत भी उन्ही में एक है.

पूजन सामग्रियों की जमकर हुयी खरीदारी

रविवार की देर शाम तक बाजारों में वट सावित्री को लेकर पूजन सामग्रियों की खरीदारी के लिये लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. मुख्य बाजार एक नंबर ट्रैफिक से लेकर बाटा चौक, पंडित दीनदयाल चौक, गांधी चौक, बेकापुर रोड, पूरबसराय, गोला रोड सहित अन्य स्थानों पर काफी भीड़ लगी रही. मंहगाई के बावजूद लोग पूजन सामग्री खरीदने में लगे रहे. वहीं महिलाएं कलश, डोली-साजी, बीनी (बांस से निर्मित हाथ पंखा), कनियां-पुतरा (कपड़े से निर्मित गुड्डा-गुड्डी), फल, मिष्ठान, श्रृंगार एवं कपड़े की खरीदारी में मशगूल रही.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMIT JHA

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By AMIT JHA

AMIT JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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