डिजिटल रजिस्ट्री से पहले ही दिन से ठप हुआ काम? तारापुर में चार दिन से नहीं हुई एक भी जमीन की रजिस्ट्री

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फोटो कैप्शन तारापुर के अवर निबंधन पदाधिकारी अमन कुमार अवर निबंधन कार्यालय में पसरा सन्नाटा चार दिनों में एक भी निबंध नहीं | Prabhat Khabar Network

बिहार के तारापुर में पेपरलेस यानी डिजिटल रजिस्ट्री शुरू होने के 4 दिन बाद भी जमीन की एक भी रजिस्ट्री नहीं हो पाई है. नई व्यवस्था लागू होने के बावजूद कामकाज ठप पड़ा है. इसके पीछे डीड राइटर, स्टांप वेंडर और सर्विस प्रोवाइडरों का विरोध प्रमुख कारण बताया जा रहा है.

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Tarapur Digital Registry: तारापुर में जमीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से बिहार के अवर निबंधन कार्यालयों में अगस्त 2026 से पेपरलेस निबंधन यानी डिजिटल रजिस्ट्री की शुरुआत की गयी है. लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के चार दिन बाद भी तारापुर अवर निबंधन कार्यालय में जमीन की रजिस्ट्री का काम लगभग ठप नजर आ रहा है.

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स्थिति यह है कि नई प्रक्रिया लागू होने के बाद अब तक एक भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं हुई है. कार्यालय में सामान्य दिनों की तरह जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों की भीड़ नहीं दिख रही है. इसके पीछे नई डिजिटल व्यवस्था को लेकर डीड राइटर, स्टांप वेंडर और सर्विस प्रोवाइडरों के विरोध को प्रमुख कारण बताया जा रहा है.

नई व्यवस्था लागू, लेकिन रजिस्ट्री का आवेदन तक नहीं

पेपरलेस निबंधन शुरू होने के बाद तारापुर अवर निबंधन कार्यालय में अभी तक एक भी जमीन की रजिस्ट्री का आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है.

इससे पहले 17 अगस्त को पुरानी पेपर आधारित प्रक्रिया के तहत सात आवेदकों ने निबंधन के लिए आवेदन किया था. उन सभी सात आवेदकों की रजिस्ट्री कर दी गयी थी. इसके बाद डिजिटल प्रक्रिया लागू होने के साथ ही रजिस्ट्री का काम पूरी तरह धीमा पड़ गया.

यानी नई व्यवस्था शुरू होने के बाद तकनीकी प्रक्रिया से ज्यादा बड़ा सवाल इसके क्रियान्वयन को लेकर सामने आ रहा है.

डीड राइटर और सर्विस प्रोवाइडर कर रहे विरोध

अवर निबंधन पदाधिकारी अमन कुमार के अनुसार, सरकार की पेपरलेस निबंधन नीति को लेकर तारापुर के डीड राइटर, स्टांप वेंडर और जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े अधिवक्ताओं के साथ बैठक की गयी थी.

बैठक में अधिकारियों की ओर से नई व्यवस्था की जानकारी दी गयी और बताया गया कि सरकार अब निबंधन प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है. अधिकारियों ने यह भी माना कि शुरुआती दौर में नई प्रक्रिया को लेकर कुछ परेशानियां सामने आ सकती हैं.

लेकिन इसके लिए संबंधित लोगों का सहयोग जरूरी है. अधिकारियों के अनुसार, डीड राइटर और सर्विस प्रोवाइडर प्रक्रिया में सहयोग करेंगे तभी नई व्यवस्था सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेगी.

कार्यालय में लगाया गया 'मे आई हेल्प यू' बोर्ड

नई व्यवस्था को लेकर लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए तारापुर अवर निबंधन कार्यालय में सिंगल विंडो सिस्टम भी शुरू किया गया है.

कार्यालय में 'मे आई हेल्प यू' का बोर्ड लगाया गया है, ताकि जमीन की रजिस्ट्री कराने आने वाले लोगों को नई डिजिटल प्रक्रिया समझने और आवेदन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सके.

अवर निबंधन पदाधिकारी का कहना है कि सरकार की पहल को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित पक्षों को सहयोग करना चाहिए.

अधिकारी बोले- नई व्यवस्था के शुरुआती दौर में हो सकती है परेशानी

अवर निबंधन पदाधिकारी अमन कुमार ने कहा कि पेपरलेस निबंधन सरकार की महत्वपूर्ण पहल है. शुरुआत में तकनीकी या प्रक्रियागत दिक्कतें आ सकती हैं, लेकिन धीरे-धीरे व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद है.

उन्होंने सर्विस प्रोवाइडरों और स्टांप वेंडरों से सरकार की पहल में सहयोग करने और पेपरलेस प्रक्रिया को बढ़ावा देने का आग्रह किया.

अधिकारी ने यह भी कहा कि तारापुर मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र और गृह क्षेत्र भी है. ऐसे में यहां नई व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू करने की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है.

दूसरी तरफ रोजगार छिनने की चिंता

नई व्यवस्था को लेकर डीड राइटर, स्टांप वेंडर और अधिवक्ताओं में अलग तरह की चिंता है. नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ संबंधित लोगों ने कहा कि सरकार की पेपरलेस व्यवस्था से उनके रोजगार पर सीधा असर पड़ सकता है.

उनका कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ी पुरानी प्रक्रिया में डीड राइटर, स्टांप वेंडर और इससे जुड़े दूसरे लोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने पर इनके काम का स्वरूप बदलने के साथ रोजगार के अवसर भी प्रभावित हो सकते हैं.

यही वजह है कि नई व्यवस्था को लेकर विरोध सामने आ रहा है.

Tarapur Digital Registry: पारदर्शिता और रोजगार के बीच संतुलन की चुनौती

सरकार की ओर से पेपरलेस निबंधन शुरू करने का उद्देश्य प्रक्रिया को आधुनिक और पारदर्शी बनाना है. लेकिन तारापुर में शुरुआती चार दिनों का अनुभव बताता है कि नई व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए केवल डिजिटल सिस्टम तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा.

लोगों को नई प्रक्रिया की जानकारी देना, तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना और इससे जुड़े पुराने कार्यबल की भूमिका को लेकर स्पष्टता देना भी जरूरी होगा.

फिलहाल तारापुर निबंधन कार्यालय में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पेपरलेस रजिस्ट्री की नई व्यवस्था कब तक पूरी तरह पटरी पर आती है और जमीन की रजिस्ट्री का काम सामान्य कब होता है. आने वाले दिनों में डीड राइटर, स्टांप वेंडर और सर्विस प्रोवाइडरों के रुख के साथ-साथ प्रशासन की पहल भी इस व्यवस्था की दिशा तय करेगी.

  फोटो कैप्शन  तारापुर के अवर निबंधन पदाधिकारी अमन कुमार  अवर निबंधन कार्यालय में पसरा सन्नाटा चार दिनों में एक भी निबंध नहीं | Prabhat Khabar Network
फोटो कैप्शन तारापुर के अवर निबंधन पदाधिकारी अमन कुमार अवर निबंधन कार्यालय में पसरा सन्नाटा चार दिनों में एक भी निबंध नहीं | Prabhat Khabar Network

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संजय वर्मा

लेखक के बारे में

By संजय वर्मा

संजय वर्मा प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. तारापुर (भागलपुर) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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