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Munger news :खतरे के निशान पर पहुंची शहर की हवा, दमा व एलर्जी के बढ़ रहे मरीज

Munger news :गंगा किनारे बसे शहरों में कभी स्वच्छ माने जानेवाले मुंगेर शहर की हवा वर्तमान में खतरे के निशान के पास पहुंच रही है. शहर के विकास को लेकर चल रही सरकारी योजनाओं व वाहनों के बढ़ते दबाव से शहर की हवा लगातार प्रदूषित हो रही है. दूसरी ओर शहर में गंदगी व जगह-जगह […]

Munger news :गंगा किनारे बसे शहरों में कभी स्वच्छ माने जानेवाले मुंगेर शहर की हवा वर्तमान में खतरे के निशान के पास पहुंच रही है. शहर के विकास को लेकर चल रही सरकारी योजनाओं व वाहनों के बढ़ते दबाव से शहर की हवा लगातार प्रदूषित हो रही है. दूसरी ओर शहर में गंदगी व जगह-जगह कूड़े को जलाने से भी हवा जहरीली हो रही है. इसके कारण लोगों में एलर्जी के साथ दमा की बीमारी भी बढ़ने लगी है. हाल यह है कि एक सप्ताह से मुंगेर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 199 से 230 के बीच चले जाने के कारण यह ऑरेंज जोन में पहुंच चुका है. सदर अस्पताल में जनवरी से अप्रैल के बीच चार माह में जहां सांस की तकलीफ के 440 मरीज आ चुके हैं, वहीं दमा के लगभग 70 मरीज इलाज के लिए पहुंच चुके हैं.

एक्यूआइ के ऑरेंज जोन में है मुंगेर शहर की हवा

एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग रिपोर्ट के अनुसार, 201 से 300 के बीच एक्यूआइ को ऑरेंज जोन में पूअर, 301 से 400 के बीच रेड जोन में वेरी पूअर तथा 401 से 500 के बीच डीप रेड जोन में खतरनाक माना जाता है. मुंगेर शहर में एक सप्ताह में एक्यूआइ इंडेक्स 199 से 230 के बीच रहा है. इसमें सबसे खतरनाक स्थिति दो से पांच मई के बीच थी, जब मुंगेर में तापमान 41 से 42 डिग्री सेल्सियस तक था. इस दौरान मुंगेर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 220 से 230 तक था. अब ऐसे में समझा जा सकता है कि मुंगेर की हवा यदि इसी तरह प्रदूषित होती रही, तो जल्द ही यह लोगों के लिए खतरनाक बन जाएगी.

प्रदूषित हवा बढ़ा रही दमा व एलर्जी की बीमारी

मुंगेर की हवा प्रदूषित होने का असर अब आमलोगों की सेहत पर भी पड़ने लगा है. हाल यह है कि जनवरी से अप्रैल के बीच चार माह में ही जहां सदर अस्पताल में 440 से अधिक मरीज सांस की तकलीफ को लेकर इलाज के लिए आ चुके हैं, वहीं दमा के लगभग 70 मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं. इतना ही नहीं, सदर अस्पताल के ओपीडी में इन दिनों एलर्जी के मरीजों की संख्या भी काफी अधिक बढ़ गयी है. एक सप्ताह में ही सदर अस्पताल के ओपीडी में एलर्जी के लगभग 200 से अधिक मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं. हालांकि सदर अस्पताल में सालों से एलर्जी के लिए कोई विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण लोग न तो एलर्जी जैसी बीमारी के प्रति अधिक सगज हैं और न ही इसके प्रति गंभीर हो रहे हैं.

सदर अस्पताल के दवा काउंटर से 14 बच्चों ने लिया इनहेलर

सामान्य रूप से इनहेलर का उपयोग दमा के मरीज करते हैं, जो एक प्रकार से सांस की एलर्जी होती है. दमा में कई बार मरीजों को प्रदूषित हवा के कारण भी सांस लेने में परेशानी होती है. ऐसे में मरीजों को चिकित्सकों द्वारा इनहेलर के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है. मुंगेर की प्रदूषित हो रही हवा के कारण बड़ों के साथ अब बच्चे भी सांस की बीमारी से पीड़ित होने लगे हैं. सदर अस्पताल के दवा काउंटर से चार माह के अंदर 14 बच्चों ने इनहेलर लिया है, जबकि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से भी प्रत्येक माह आठ से 10 इनहेलर की बिक्री हो रही है.

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