मुंगेर शहर में अधिकांश सरकारी चापानल फेल, आम लोग पानी के लिए परेशान, विभाग ने साधी चुप्पी

The department kept silence
मुंगेर .भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में सड़क से गुजरने वाले अधिकांश राहगीरों को प्यास तो लगती ही है. ऐसे में अगर पीने के लिए पानी न मिले तो क्या गुजरेगी इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है. सरकार ने विभिन्न विभागों की मदद से कई योजनाओं के तहत शहर से लेकर गांव तक शुद्ध पेयजल की व्यवस्था को सुदृढ़ करने का काम किया. शहरवासियों और राहगीरों के लिए शहर में प्याऊ बनाया गया, 1.98 करोड़ की लागत से शहरी पेयजलापूर्ति योजना का काम अंतिम चरण है. शहर के हर मोड़, मुहल्ले में पीएचइडी, विधायक, एमएलसी व सांसद योजना से दो दशक में 4000 से अधिक चापाकल लगाये गये. बावजूद शहरवासी और राहगीर दोनों इस भीषण गर्मी में पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं. सरकारी चापाकलों की स्थिति यह है कि वह खड़ी तो है, लेकिन उससे पानी की बूंद नहीं निकल रही है. पानी टंकी नीलम सिनेमा रोड
शहर के पानी टंकी नीलम सिनेमा रोड में प्याऊ और चापाकल दोनों लगा हुआ है. प्याऊ जहां वर्षों से खराब पड़ा हुआ है. वहीं दूसरी और चापाकल भी खराब है. इस मुहल्ले के गरीब लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है. क्योंकि अभी शहरी पेयजलापूर्ति योजना चालू नहीं हुआ है. सबसे अधिक परेशानी उस मार्ग में चलने वाले राहगीरों को उठानी पड़ती है. जो बोतल बंद पानी अथवा दुकानदार से आरजू मिन्नत कर पानी मांग कर प्यास बुझा रहे है. दो नंबर गुमटी रोडहॉफ टाइम स्कूल दो नंबर गुमटी रोड में भी हथिया चापाकल लगा हुआ है. जिस पर इस मुहल्ले के गरीब लोग पानी के लिए आश्रित हुआ करते थे. लेकिन यह चापाकल कई वर्षों से खराब पड़ा हुआ है. जिसके कारण यहां के गरीब लोग पानी के लिए वैसे लोगों पर आश्रित है जिनके घरों में समरसेबल लगा हुआ है. इस क्षेत्र के छोटे-मोटे नाश्ता दुकान चलाने वाले दुकानदारों को पानी के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है.
गांधी चौक के पास भी खराब है चापाकल
शहर के गांधी चौक के पास भी सरकारी योजना से हथिया चापाकल लगाया गया था. जो वर्षों से खराब है. जबकि इस मार्ग में राहगीरों की अधिक आवाजाही है. बावजूद पीएचइडी विभाग उसे दुरुस्त नहीं कराया. जिसके कारण इस मार्ग में चलने वाले राहगीरों को पानी के लिए काफी जद्दोजहद करना पड़ता है. दारू गोदामा के पास खड़ा है चापाकलदारू गोदाम के पास भी चापाकल खड़ा है. जो पानी नहीं उगलता है. क्योंकि यहां पर गड़ा हथिया चापाकल वर्षों से खराब पड़ा हुआ है. इस मार्ग में चलने वाले राहगीर और स्थानीय गरीब लोगों को पानी के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती है. सुबह होते ही गरीब परिवार के लोग गैलन, बाल्टी लेकर पानी के लिए निकल पड़ते है.
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बॉक्स —————————————————————- विभाग की नजर में मुंगेर व जमालपुर शहर में मात्र 114 चापाकल खराब मुंगेर : पीएचइडी विभाग के पास यह आंकड़ा तक नहीं है कि मुंगेर शहरी क्षेत्र में पिछले दो दशक में कितना चापाकल किस मद से लगाया गया है. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मुंगेर एवं जमालपुर शहरी क्षेत्र में 114 चापाकल खराब है. जबकि मुंगेर शहर में सिर्फ विभिन्न सरकारी मद एवं एमएलसी, विधायक व सांसद कोटे से 4000 से अधिक चापाकल दो दशक में गाड़े गये है. जिसमें 2000 से 2500 चापाकल खराब पड़ा हुआ है्. चापाकलों की हालत यह है कि आज कई जगहों पर वह खुटे का काम कर रही है. मरम्मती दल है गठित, फिर ठीक नहीं हो रहा चापाकलपीएचइडी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में विभागीय चापाकलों की संख्या 9239 है. जिसमें 2207 चापाकल खराब है. गर्मी में पानी संकट को दूर करने के लिए पीएचइडी विभाग ने 10 चलंत मरम्मति दल का गठन किया गया. जो बंद चापाकलों की मरम्मती कर चालू करेंगे. इस चालू वित्तीय वर्ष में 2219 चापाकल मरम्मति कराने का लक्ष्य दिया गया. जिसे पिछले दिनों जिलाधिकारी ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया था. लेकिन प्रभात खबर की टीम ने जब शहर में घूम-घूम कर चापाकलों का जायजा लिया तो सैकड़ों चापाकल खराब पड़ा मिला.
कहते हैं पीएचइडी विभाग के कार्यपालक अभियंता
पीएचइडी विभाग के कार्यपालक अभियंता अभिरंजन ने बताया कि शहर में कई ऐसे चापाकल है जिसकी आयु समाप्त हो चुकी है. जिसकी मरम्मती कर चालू नहीं किया जा सकता है. मुंगेर व जमालपुर शहर में जब सर्वे कराया तो 114 चापाकल खराब मिले. जिसकी मरम्मती करायी जा रही है. अधिकांश चापाकलों को दुरुस्त कर चालू कर दिया गया है. जहां से भी खराब चापाकल की सूचना मिल रही है वहां मिस्त्री को भेज कर उसे ठीक कराने का काम किया जा रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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