सदर अस्पताल में लगातार बढ़ रहा बाहरी लोगों का दखल, परेशान मरीज

Updated at : 18 Mar 2026 11:15 PM (IST)
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सदर अस्पताल में लगातार बढ़ रहा बाहरी लोगों का दखल, परेशान मरीज

आये दिन बाहरी लोग मरीजों को बरगलाकर पहुंचा रहे निजी अस्पताल

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मुंगेर. सदर अस्पताल में लगातार बाहरी लोगों का दखल बढ़ता जा रहा है. इसके कारण आये दिन अस्पताल में दलाली व मरीजों के साथ दुर्व्यवहार किये जाने या मरीजों को बरगलाकर निजी अस्पताल ले जाने का मामला सामने आता है. हालांकि इसका सबसे बड़ा कारण सदर अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है. बता दें कि सालों से सदर अस्पताल में जहां ड्रेसर का स्वीकृत छह पद पूरी तरह रिक्त पड़ा है, जबकि चतुर्थवर्गीय कर्मी और परिचारिकाओं की भी कमी है. इससे भी अस्पताल प्रबंधन सदर अस्पताल में लगातार बढ़ रहे बाहरी लोगों के दखल को रोक नहीं पा रहा.

सालों से अस्पताल में नहीं हैं एक भी ड्रेसर

सदर अस्पताल में पुरुष, महिला, आइसीयू, एनआरसी, एनसीडी, पीकू, एसएनसीयू, एमसीएच, प्रसव केंद्र, ओटी, ओपीडी, टीकाकरण समेत कुल 12 वार्ड संचालित होते हैं. जहां परिचारिकाओं (नर्सों) के कुल 50 पद स्वीकृत हैं. जहां वर्तमान में मात्र 39 परिचारिकाएं ही कार्यरत हैं. इनके अतिरिक्त सदर अस्पताल में घायलों व अन्य मरीजों के घावों के ड्रेसिंग के लिए ड्रेसर के कुल स्वीकृत पद छह हैं, जो पूरी तरह खाली हैं. इतना ही नहीं चतुर्थवर्गीय कर्मियों के साथ अस्पताल में फॉर्मासिस्ट के कुल पांच स्वीकृत पद में मात्र एक कार्यरत हैं. इतना ही नहीं प्रयोगशाला सहायकों के कुल स्वीकृत तीन पद भी पूरी तरह रिक्त पड़े हुए हैं.

वार्डों में भी पहुंच जा रहे बाहरी लोग

सदर अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण ही बाहरी लोगों का दखल बढ़ रहा है. इसके कारण ही आये दिन सदर अस्पताल में मरीजों को निजी नर्सिंग होम ले जाने, मरीजों से इलाज के नाम पर पैसे लिये जाने सहित दलाली के कई मामले सामने आते हैं. इतना ही नहीं परिचारिकाओं की कमी के कारण एक परिचारिकाओं को एक शिफ्ट में दो या उससे अधिक वार्डों की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है. ऐसे में बाहरी लोगों का दखल वार्डों में भी बढ़ जाता है.

कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ राजू ने बताया कि अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की काफी कमी है. इससे विभाग को कई बार अवगत कराया गया है. हालांकि अस्पताल में किसी बाहरी व्यक्ति के कार्य करने या बिना कारण बैठने पर प्रतिबंध है. ऐसा करते पाये जाने पर संबंधित पर कार्रवाई की जायेगी.

कई बार सामने आ चुका है बाहरी लोगों का दखल

17 मार्च 2026

: हवेली खड़गपुर से रेफर कर परिजन सुजीत कुमार की 22 वर्षीय पत्नी स्वीटी कुमारी को सदर अस्पताल के प्रसव केंद्र में मौजूद एक दलाल बहलाकर निजी अस्पताल लेकर चली गयी. हालांकि निजी अस्पताल में मरीज से 30 हजार रुपये मांगे जाने के बाद परिजन वापस स्वीटी कुमारी को लेकर अस्पताल आ गये.

5 फरवरी 2026

: सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज के दौरान एक मरीज के परिजनों के साथ वहां कार्य कर रहे एक निजी कंपाउंडर द्वारा दुर्व्यवहार किया गया. इसके बाद परिजनों की शिकायत पर अस्पताल प्रबंधन ने उक्त प्राइवेट कंपाउंटर पर प्राथमिकी दर्ज करायी.

15 जनवरी 2026

: सदर अस्पताल के प्रसव वार्ड में इलाज कराने पहुंची एक गर्भवती को आशा व स्वास्थ्यकर्मी द्वारा बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल ले जाया गया था. मामले की जांच के लिए सिविल सर्जन ने तीन सदस्यीय कमेटी भी बनायी, लेकिन मामला फाइलों में ही दबकर रह गयी.

2 जनवरी 2026

: सदर अस्पताल के प्रसव केंद्र में एक गर्भवती के परिजनों से वहां मौजूद आशा व स्वास्थ्यकर्मी ने सिजेरियन प्रसव के नाम पर 15 हजार रुपये ले लिया था. मामले की जांच के बाद उक्त स्वास्थ्यकर्मी को दूसरे वार्ड में भेज दिया गया था.

13 मई 2025

: डॉ रामप्रवेश ने अस्पताल उपाधीक्षक का पदभार ग्रहण करने के बाद देर शाम इमरजेंसी वार्ड की जांच की थी. इस दौरान भी कई बाहरी लोग वार्ड में कार्य करते मिले थे.

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RANA GAURI SHAN

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