प्रस्तावित शिक्षा विधेयक पर कर्मचारी संघ ने जताई अपनी चिंता

मुंगेर विश्वविद्यालय | Prabhat Khabar Network
बिहार के प्रस्तावित शिक्षा विधेयक को लेकर कर्मचारी संघ ने चिंता जताई है। कुलाधिपति से इस पर पुनर्विचार करने और सभी हितधारकों से चर्चा करने का आग्रह किया गया है।
मुंगेर. प्रस्तावित शिक्षा विधेयक पर शिक्षक संघ के बाद अब बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी मुंगेर विश्वविद्यालय प्रक्षेत्र ने भी चिंता व्यक्त की है. साथ ही कुलाधिपति से विधेयक पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है. महासंघ के मुंगेर विश्वविद्यालय प्रक्षेत्रीय अध्यक्ष गुंजेश कुमार सिंह ने इसे बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए दूरगामी एवं गंभीर दुष्प्रभाव उत्पन्न करने वाला कदम बताया है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि शिक्षण, शोध, पाठ्यक्रम निर्माण, परीक्षा संचालन, गुणवत्ता नियंत्रण, शिक्षक विकास तथा अकादमिक स्वायत्तता का प्रमुख केंद्र होता है. स्नातक महाविद्यालयों को विश्वविद्यालयों से पृथक कर सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अधीन कर दिया जाता है तो विश्वविद्यालयों की संबद्धता व्यवस्था कमजोर होगी तथा उनकी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक भूमिका सीमित होकर रह जाएगी.
विश्वविद्यालयों की अकादमिक परिषद होगा प्रभावित
प्रक्षेत्रीय अध्यक्ष कहा कि इस प्रस्तावित व्यवस्था से विश्वविद्यालयों की अकादमिक परिषद, अध्ययन बोर्ड, संकाय, परीक्षा समिति एवं अन्य वैधानिक निकायों की प्रभावशीलता प्रभावित होगी. विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के बीच वर्षों से स्थापित शैक्षणिक समन्वय बाधित होगा. जिससे पाठ्यक्रम विकास, परीक्षा प्रणाली, शोध गतिविधियों, मूल्यांकन प्रक्रिया तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है. प्रक्षेत्र उपाध्यक्ष ब्रजेश कुमार ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कमजोर होगी, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सेवा-संबंधी समस्याएँ बढ़ेंगी तथा विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित भी प्रभावित होंगे.
प्रस्तावित संशोधनों पर तत्काल पुनर्विचार की अपील की
विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के बीच समन्वित व्यवस्था ही उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम रही है. महासंघ मुंगेर विश्वविद्यालय इकाई ने कुलाधिपति और राज्य सरकार से आग्रह किया है कि स्नातक महाविद्यालयों के पुनर्गठन एवं विश्वविद्यालय अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए. साथ ही विश्वविद्यालयों, शिक्षकों, कर्मचारियों, शिक्षा विशेषज्ञों, छात्र प्रतिनिधियों तथा सभी संबंधित हितधारकों से व्यापक विमर्श कर ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाए.
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लेखक के बारे में
By अमित झा
अमित झा प्रिंट माध्यम में 06 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.
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