23 साल पहले रखी गई थी नींव, आज तक नहीं बन सका आचार्य नंदलाल बसु कला शोध संस्थान

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फोटो --1.शोध संस्थान निर्माण के लिए लगा शिलापट्ट            2.शिलान्यास स्थल पर उगे जंगल --झाड़ | Prabhat Khabar Network

फोटो- शिलान्यास स्थल पर उगे जंगल-झाड़ | Prabhat Khabar Network

आचार्य नंदलाल बसु कला शोध संस्थान का सपना 23 साल बाद भी अधूरा है. 2003 में हुए शिलान्यास के बावजूद आज भी निर्माण शुरू नहीं हो सका है. कला प्रेमी शीघ्र निर्माण की मांग कर रहे हैं.

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Nandalal Bose Research Institute: गेर जिले के हवेली खड़गपुर स्थित हरि सिंह महाविद्यालय परिसर में प्रस्तावित आचार्य नंदलाल बसु कला शोध संस्थान एवं सभागार का निर्माण दो दशक से अधिक समय बाद भी अधूरा है. वर्ष 2003 में हुए शिलान्यास के बावजूद संस्थान की एक ईंट तक नहीं जुड़ सकी. स्थानीय कला प्रेमियों, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों ने संस्थान का निर्माण शीघ्र शुरू कराने की मांग उठायी है.

कला गुरु की जन्मभूमि पर नहीं है उनकी एक भी कलाकृति

आचार्य नंदलाल बसु भारतीय कला जगत के उन महान चित्रकारों में गिने जाते हैं, जिनकी ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रही है. उनकी तुलना राजा रवि वर्मा, पाब्लो पिकासो और लियोनार्डो दा विंची जैसे महान कलाकारों से की जाती है. विडंबना यह है कि उनकी जन्मभूमि हवेली खड़गपुर में आज उनकी एक भी मूल कलाकृति संरक्षित नहीं है.

सीनेट में रखा गया था शोध संस्थान का प्रस्ताव

Nandalal Bose Research Institute: वर्ष 2003 में हरि सिंह महाविद्यालय के तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य स्व. उमेश कुमार उग्र ने, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य रहते हुए, नंदलाल बसु की कलाकृतियों के संरक्षण के लिए शोध संस्थान और संग्रहालय स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था. तत्कालीन कुलपति डॉ. रामाश्रय प्रसाद यादव ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए सीनेट से अनुमोदित कराया.

3 दिसंबर 2003 को हुआ था शिलान्यास

3 दिसंबर 2003 को तत्कालीन कुलपति डॉ. रामाश्रय प्रसाद यादव ने हरि सिंह महाविद्यालय परिसर में आचार्य नंदलाल बसु कला शोध संस्थान एवं सभागार का शिलान्यास किया था. कार्यक्रम की अध्यक्षता स्व. उमेश कुमार उग्र ने की थी. उस अवसर पर महाविद्यालय के संस्थापक एवं पूर्व श्रम मंत्री स्व. शमशेर जंग बहादुर तथा तत्कालीन विधायक जयप्रकाश नारायण यादव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे. सभी ने इसे नंदलाल बसु के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया था.

23 साल बाद भी अधूरा है सपना

शिलान्यास के बाद निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका. आज प्रस्तावित स्थल पर भवन की जगह केवल झाड़ियां और घास दिखाई देती हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2003 के बाद महाविद्यालय प्रशासन और विश्वविद्यालय स्तर पर इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं हुई.

कला प्रेमियों ने उठाई निर्माण शुरू करने की मांग

पूर्व प्राचार्य प्रो. रामचरित्र सिंह, प्रो. महेश चंद्र चौरसिया, अशोक सिंह, प्रदीप पाल, रजनीश झा, अंजनी कुमार, पंकज यादव, शिव प्रकाश फंटूश सहित अनेक छात्र, शिक्षक और कला प्रेमियों ने मांग की है कि आचार्य नंदलाल बसु की स्मृतियों को संरक्षित करने के लिए शोध संस्थान एवं सभागार का निर्माण शीघ्र शुरू कराया जाए. उनका कहना है कि इससे न केवल कला विरासत सुरक्षित होगी, बल्कि हवेली खड़गपुर राष्ट्रीय कला मानचित्र पर भी नई पहचान बनायेगा.


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