भागवत कथा के दौरान हयग्रीव अवतार व मधु कैटभ राक्षसों के वध का हुआ वर्णन

श्री श्री 108 महामाया शक्ति धाम मंदिर प्रांगण में चल रहे श्रीमद् देवी भागवत के दूसरे दिन शुक्रवार को गुजरात से आये संत कौशिक भाई भट्ट ने माता रानी की लीला पर प्रकाश डाला.
जमालपुर. मारवाड़ी धर्मशाला परिसर स्थित श्री श्री 108 महामाया शक्ति धाम मंदिर प्रांगण में चल रहे श्रीमद् देवी भागवत के दूसरे दिन शुक्रवार को गुजरात से आये संत कौशिक भाई भट्ट ने माता रानी की लीला पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि आषाढ़ नवरात्रि के पावन दिनों में आयोजित भगवती कथा का विशेष महत्व होता है. दूसरे दिन उन्होंने भगवान विष्णु का हयग्रीव अवतार एवं मधु कैटभ राक्षसों के वध की कथा सुनाई. उन्होंने कहा कि पूरे ब्रह्मांड का जो सुप्रीम पावर है. वही माता शक्ति के रूप में है. सारे जगत की रचना भगवती शक्ति की देन है. भगवती की कृपा के बिना पत्ता भी नहीं हिलता है. उन्होंने बताया कि 1 वर्ष में चार नवरात्रि मनाया जाता है. इनमें से दो प्रकट नवरात्रि होती है. इसमें एक नवरात्रि चैत्र महीने में दूसरा नवरात्रि शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है. जो असिन महीने में मनाया जाता है और दो गुप्त नवरात्रि होती है. जिसे माघ और आषाढ़ महीना में मनाया जाता है. उन्होंने बताया कि इन्हें गुप्त इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनमें देवी दुर्गा की पूजा गुप्त रूप से की जाती है. इस दौरान 10 महाविद्याओं की पूजा का विधान है. अपने प्रवचन के सिलसिले में उन्होंने सुखदेव जी के प्रकट होने की कथा भी सुनायी. मौके पर माधव पूजा मस्कारा, गोपाल मोना अग्रवाल, महेश शंघाई, गिरधर संगी, योगेश अग्रवाल, राजकुमार शर्मा, पुरुषोत्तम मेहरिया, राजू मेहरिया, विशाल, अंकित, श्याम, अर्पिता, आशीष आदि मौजूद थे.
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