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Motihari : बौद्ध स्तूप परिसर स्थित राजमाता मंदिर बना आस्था का प्रमुख केंद्र

Updated at : 24 Sep 2025 5:19 PM (IST)
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Motihari : बौद्ध स्तूप परिसर स्थित राजमाता मंदिर बना आस्था का प्रमुख केंद्र

स्थानीय बौद्ध स्तूप परिसर में स्थित राजमाता मंदिर आज भी आस्था और श्रद्धा का प्रतीक बना हुआ है.

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केसरिया. स्थानीय बौद्ध स्तूप परिसर में स्थित राजमाता मंदिर आज भी आस्था और श्रद्धा का प्रतीक बना हुआ है. यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इसका इतिहास भी केसरिया स्तूप और स्थानीय राजवंश से गहराई से जुड़ा हुआ है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल कभी राजा वेणु के गढ़ का हिस्सा था. कहा जाता है कि राजा वेणु के पुत्र सम्राट पृथु की तपस्या से प्रसन्न होकर एक ममतामयी स्वरूप में राजमाता यहां प्रकट हुईं. राजा वेणु द्वारा स्थापित मां की पिंडी को ही राजमाता के नाम से जाना जाता है. नवरात्रों के दौरान इस मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है. इस अवसर पर दूर-दराज़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं. स्थानीय श्रद्धालु विश्वभर झा, आचार्य पंडित नन्द लाल मिश्र, डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि नवरात्रों में इस मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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HIMANSHU KUMAR

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By HIMANSHU KUMAR

HIMANSHU KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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