केवल मानव का कलेवर धारण करना मनुष्य बनना नहीं : बैदेही शरण

Published by :RAJNIKHIL BANJRIYA
Published at :22 Mar 2025 5:52 PM (IST)
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केवल मानव का कलेवर धारण करना मनुष्य बनना नहीं : बैदेही शरण

कथावाचिका बैदेही शरण मानस मन्दाकनी ने दूसरे दिन कहा कि मनुष्य बनना बड़ा कठिन है. केवल मानव का कलेवर धारण करना मनुष्य बनना नहीं है.

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बंजरिया. सिंघिया हीवन माई स्थान चौक के समीप स्थित पंचमंदिर फुलवारी में आयोजित श्रीराम चरित मानस नवारह्न्य पारायण महायज्ञ में यूपी अयोध्या से पधारी कथावाचिका बैदेही शरण मानस मन्दाकनी ने दूसरे दिन कहा कि मनुष्य बनना बड़ा कठिन है. केवल मानव का कलेवर धारण करना मनुष्य बनना नहीं है. मनुष्य की आकृति पा लेना मनुष्य बनना नहीं है. यदि ऐसी बात होती तो ऋग्वेद ऐसा नहीं कहता कि मनुष्य बनो, मनुरभाव कितनी बड़ी बात वैदिक ऋषि ने दो शब्दों में कही है, ””””मनुरभाव, मनुष्य बनो””””. क्या ऋषि यह नहीं जानते थे कि हमारे शिष्य या धरती पर के मानव मनुष्य ही तो हैं? फिर भी उन्होंने उपदेश दिया कि मनुष्य बनो. कहा कि हमारे वैदिक ऋषि अपने अनुभव से यह जान चुके थे कि मनुष्य की योनि पा लेना ही मनुष्य बनना नहीं है. मनुष्य का कलेवर हो और आचरण पशु का हो या राक्षस का हो तो उसे मनुष्य नहीं कहा जा सकता. मानव शब्द का अर्थ है मनात, मनुष्य जो मनन करें, वह मनुष्य है. मनन अर्थात् चिंतन, अर्थात् वह विचार करें कि वह कौन है, क्या है, उसे क्या करना है. उन्होंने कहा कि श्रीरामचरितमानस हमें मनुष्य बनने की प्रेरणा देता है. अध्यक्ष उमेश सिंह ने बताया कि यहां पर बीते 48 वर्षों से महायज्ञ का आयोजन होते आ रहा है.

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