सरकारी अस्पतालों में मुफ्त मिल रहे गर्भनिरोधक साधन, जानिए गर्भपात के बाद डॉक्टर क्या सलाह दे रहे हैं

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प्रतीकात्मक तस्वीर

स्वास्थ्य विभाग महिलाओं के स्वास्थ्य और परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए एक जागरूकता अभियान चला रहा है। सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में गर्भनिरोधक साधन उपलब्ध हैं, जो अनियोजित गर्भधारण को रोकने में मदद करते हैं।

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Post Abortion Care: महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा और परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता अभियान शुरू किया है. विभाग ने दंपतियों से अपील की है कि गर्भपात के बाद चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपयुक्त गर्भनिरोधक साधन अपनाएं, ताकि अनियोजित गर्भधारण से बचा जा सके.

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सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध हैं कई सुविधाएं

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सदर प्रखंड सहित जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर परिवार नियोजन से जुड़ी कई सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं. इनमें शामिल हैं:

  • आईयूसीडी-380ए (10 वर्ष तक प्रभावी)
  • आईयूसीडी-375 (5 वर्ष तक प्रभावी)
  • गर्भनिरोधक इंजेक्शन
  • महिला नसबंदी
  • पुरुष नसबंदी
  • कंडोम (निरोध)
  • माला-एन गर्भनिरोधक गोलियां
  • छाया गर्भनिरोधक गोलियां

इन साधनों का वितरण स्वास्थ्य केंद्रों के साथ-साथ आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी किया जा रहा है.

डॉक्टर ने क्या कहा?

पीएचसी प्रभारी डॉ. दिलीप कश्यप ने बताया कि गर्भपात के बाद बिना पर्याप्त अंतराल के दोबारा गर्भधारण होने की संभावना रहती है. ऐसे में महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार गर्भनिरोधक साधन अपनाना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि सदर पीएचसी समेत सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर परिवार नियोजन से जुड़ी सेवाएं और गर्भनिरोधक साधन पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हैं.

आशा कार्यकर्ता से भी ले सकते हैं जानकारी

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि परिवार नियोजन संबंधी जानकारी या सेवाओं का लाभ लेने के लिए लोग अपने नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या आशा कार्यकर्ता से संपर्क कर सकते हैं.

विभाग का कहना है कि परिवार नियोजन अपनाने से मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है, साथ ही परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक दंपतियों को सुरक्षित और प्रभावी परिवार नियोजन सेवाओं से जोड़ना है.

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