उम्र घटाने के खेल में ‘फर्जी’ सर्टिफिकेट का प्रयोग, स्कूल के रिकॉर्ड में एडमिशन तक नहीं, अब पुलिस करेगी जांच

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मामले की जांच करती पुलिस (सांकेतिक) | AI जेनरेटेड

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एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहां एक किशोर की उम्र कम साबित करने के लिए कथित तौर पर फर्जी स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया गया. जांच में विद्यालय के रिकॉर्ड में छात्र का नाम तक नहीं मिला. अब पुलिस इस मामले की जांच करेगी.

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मोतिहारी क्राइम: किशोर की उम्र कम साबित करने के लिए कथित तौर पर फर्जी स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है. जांच के दौरान जिस विद्यालय के नाम से प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया, उसके रिकॉर्ड में संबंधित किशोर का नामांकन ही नहीं मिला. विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने प्रमाण-पत्र पर लगी मुहर और हस्ताक्षर को भी अपने अभिलेखों से मेल नहीं खाने वाला बताया. मामले में किशोर न्याय परिषद, पूर्वी चंपारण ने नगर थाने को प्राथमिकी दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया है.

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2018 में कक्षा-1 में नामांकन का किया गया दावा

मामला जेजे बोर्ड वाद संख्या 1592/26, सरकार बनाम रजनीश कुमार से जुड़ा है. परिषद की ओर से नगर थानाध्यक्ष को भेजे पत्र के अनुसार, न्यायिक कार्यवाही के दौरान रिमा देवी की ओर से शपथ-पत्र के साथ राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, उचिडीह, आदापुर के नाम से जारी कथित स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट प्रस्तुत किया गया था.

प्रमाण-पत्र में रजनीश कुमार का वर्ष 2018 में कक्षा-1 में नामांकन होने का उल्लेख किया गया था. इसकी सत्यता जांचने के लिए परिषद ने संबंधित विद्यालय से अभिलेख मांगे थे.

स्कूल रिकॉर्ड में नहीं मिला नाम

विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रभु पासवान ने लिखित बयान में बताया कि वर्ष 2018 में रजनीश कुमार का कक्षा-1 में नामांकन विद्यालय के अभिलेखों में दर्ज नहीं है.

प्रधानाध्यापक ने कथित प्रमाण-पत्र पर लगी विद्यालय की मुहर और हस्ताक्षर को भी वास्तविक अभिलेखों के अनुरूप नहीं माना. उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किशोर न्याय परिषद ने प्रमाण-पत्र को प्रथमदृष्टया कूटरचित या जाली माना है.

उम्र कम दिखाने की कोशिश का आरोप

परिषद के पत्र के अनुसार, मूल अभिलेख में संबंधित किशोर की उम्र करीब 18 वर्ष अधिक अंकित है. ऐसे में कथित शैक्षणिक प्रमाण-पत्र के माध्यम से उम्र कम दिखाने का प्रयास किए जाने की बात सामने आयी है.

परिषद ने मामले को न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और निर्धारित आयु-निर्धारण प्रक्रिया को प्रभावित करने से जुड़ा गंभीर विषय माना है. हालांकि प्रमाण-पत्र किसने तैयार किया और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया, यह पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगा.

नगर थाने को FIR और जांच का निर्देश

किशोर न्याय परिषद के निर्देश पर नगर थाने में रिमा देवी की ओर से प्रस्तुत शपथ-पत्र और कथित कूटरचित स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जाएगी.

इंस्पेक्टर राजीव रंजन के अनुसार, जांच में प्रमाण-पत्र तैयार करने, उसे प्रस्तुत करने और इस्तेमाल किए जाने से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी. परिषद ने पुलिस से कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष से उसे अवगत कराने को भी कहा है.

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