लखनौर के दीप गांव में चर्यागीत पुस्तक का लोकार्पण, डॉ. रामानंद झा रमण ने रखे विचार

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पुस्तक का लोकार्पण करते अतिथि | Prabhat Khabar Network

पुस्तक का लोकार्पण करते अतिथि

मधुबनी के लखनौर में डॉ शशिनाथ झा द्वारा लिखित चर्यागीत पुस्तक का लोकार्पण हुआ. विद्वानों ने इसे मैथिली साहित्य की प्राचीन और महत्वपूर्ण धरोहर बताया है.

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Madhubani News: लखनौर प्रखंड के दीप गांव में मंगलवार को चर्यागीत पुस्तक के लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मैथिली साहित्य और भाषा के क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित विद्वानों ने हिस्सा लिया और पुस्तक की विषयवस्तु पर अपने विचार रखे. चर्यागीत की मैथिली व्याख्या कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. शशिनाथ झा ने की है. पुस्तक का प्रकाशन नवारंभ, मधुबनी की ओर से किया गया है.

डॉ. रामानंद झा रमण ने किया पुस्तक का लोकार्पण

चर्यागीत पुस्तक का लोकार्पण प्रसिद्ध समालोचक डॉ. रामानंद झा रमण ने किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पुस्तक की भूमिका में विषय से संबंधित महत्वपूर्ण बातों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया है. मैथिली भाषा के संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया आदि शब्दों का इसमें भाषावैज्ञानिक विवेचन किया गया है.

उन्होंने कहा कि चर्यागीत को मैथिली भाषा के स्वतंत्र ग्रंथ के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो साहित्य और भाषा के अध्येताओं के लिए महत्वपूर्ण है.

चर्या का अर्थ पवित्र आचार : अमल कुमार झा

मिथिला-मैथिली के विशिष्ट अध्येता अमल कुमार झा ने कहा कि चर्या का अर्थ पवित्र आचार होता है. चर्यागीत सातवीं सदी के सरह, भूसुक आदि सिद्धों की रचनाओं से जुड़ा साहित्यिक स्रोत है.

उन्होंने कहा कि पुस्तक की व्याख्या में स्पष्ट किया गया है कि चर्यागीत मैथिली साहित्य की प्राचीन संपत्ति है. इसके प्रकाशन से मैथिली साहित्य के पुराने स्वरूप को समझने में पाठकों और शोधार्थियों को मदद मिलेगी.

चर्यापद को मैथिली साहित्य की प्राचीन धरोहर के रूप में किया प्रस्तुत

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि चर्यापद को स्वतंत्र रूप से मैथिली साहित्य के प्राचीन ग्रंथ के रूप में स्थापित करते हुए इसका प्रकाशन महत्वपूर्ण कार्य है. पुस्तक में प्राचीन साहित्यिक सामग्री के साथ मैथिली भाषा के स्वरूप और शब्दों का अध्ययन भी किया गया है.

विद्वानों ने चर्यागीत को मिथिला-मैथिली के साहित्यिक इतिहास के अध्ययन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया.

कई विशिष्ट विद्वान रहे मौजूद

लोकार्पण समारोह में पंडित दीनानाथ मिश्र, राम प्रसाद मंडल, डॉ. प्रमोद झा, उदयनाथ झा सहित कई विशिष्ट लोग उपस्थित रहे. कार्यक्रम के दौरान विद्वानों ने चर्यागीत पुस्तक की उपयोगिता और मैथिली साहित्य के अध्ययन में इसके महत्व पर अपने विचार रखे.

कार्यक्रम के अंत में उदयनाथ झा ने धन्यवाद ज्ञापन किया. इसके साथ ही पुस्तक लोकार्पण समारोह का समापन हुआ.

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Kunjan Kumar Putti

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