मधुबनी.
नगर निगम शहर में अपनी दुकानों से किराये की वसूली में लगातार पिछड़ रहा है. विभिन्न बाजारों से निगम को बकाया नहीं मिल रहा है. किरायेदार भी किराया देने में उदासीन बने हुए हैं. निगम इन पर दंडात्मक कार्रवाई करेगी. दरअसल, निजी होल्डिंग टैक्स निर्धारण के बाद डिमांड बनाने में नगर निगम के टैक्स कलेक्टर को लगाया गया है. इस कारण बाजार से वसूली में निगम लगातार पीछे रहा है. वित्तीय वर्ष की समाप्ति पर बाजार किराया 14.48 फीसदी ही आया है, जबकि निगम को 95 लाख 85 हजार रुपये वसूल करना शेष रह गया है. विदित हो कि नगर निगम के शहर में 230 दुकानें हैं. जिससे प्रतिवर्ष 47 लाख रुपये किराया राजस्व के रूप में आता है. लेकिन वार्षिक रिपोर्ट के आधार पर सिर्फ 16 लाख 25 हजार 614 रुपये की वसूली हुई है. जो काफी निराशाजनक है.चालू वित्तीय वर्ष में 47 लाख की है मांग
नगर निगम का बाजार किराया करीब 95.85 लाख बकाया है. पिछले वित्तीय वर्ष में सिर्फ 16 लाख 25 हजार 16 हजार की वसूली हुई. इस वित्तीय वर्ष के अंत तक उसे 1 करोड़ 42 लाख रुपये वसूल करने, बाजार किराया के रूप में वित्तीय वर्ष 2024- 25 के अवशेष 95 लाख रुपये हैं, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में मांग करीब 47 लाख रुपये हैं. इस तरह कुल मांग करीब एक करोड़ 42 लाख रुपये हैं.दुकान किसी के नाम आवंटित, किराये पर है कोई और
बताया जा रहा है कि निगम की 230 दुकान किराये पर है. इसमें से कई दुकानें ऐसी हैं जिसमें आवंटित किसी के नाम से और दुकान कोई दूसरा चला रहा है. मिली जानकारी के मुताबिक, आवंटित दुकान के मालिक नगर निगम से तय किराया से अधिक लेकर दूसरों को दुकान दिये हुए है. आवंटित दुकानों की जांच हो तो कई तरह की खामियां सामने आएगी. बताते हैं चलें कि नगर निगम का किराया 3 से 10 रुपये प्रति वर्ग फीट है. लोगों की माने तो एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम से भी दुकान आवंटित है.
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