मधुबनी.
डेंगू एक गंभीर बीमारी के रूप में उभरा है. हर साल इस घातक बीमारी की वजह से लाखों लोगों की जान जाती है. जिसके कारण डेंगू बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 16 मई को राष्ट्रीय डेंगू दिवस मनाया जाता है. इस संबंध में अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. एके सिन्हा ने सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार को पत्र भेजकर आवश्यक दिशा निर्देश दिया है. राष्ट्रीय डेंगू दिवस 2025 “शीघ्र कार्रवाई करें, डेंगू को रोकें: स्वच्छ परिवेश, स्वस्थ जीवन ” स्वस्थ शुरुआत, आशाजनक भविष्य ” थीम के तहत मातृ एवं नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर केंद्रित अभियान की शुरुआत होगी. मौत रोकने व महिलाओं के दीर्घकालिक कल्याण को प्राथमिकता देने का भी आग्रह किया गया है. सिविल सर्जन ने कहा कि सदर अस्पताल एवं अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारीयों, गैर सरकारी संगठनों एवं सहयोगी संस्था के साथ समन्वय स्थापित कर डेंगू की रोकथाम के प्रति जनसमुदाय को जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही राष्ट्रीय डेंगू दिवस के आयोजन से संबंधित प्रतिवेदन 3 दिनों के अंदर उपलब्ध कराने को कहा है. ताकि राज्य को समय पर प्रतिवेदन भेजा जा सके. सिविल सर्जन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से डेंगू का प्रकोप काफी बढ़ गया है. मानसून के आरंभ होते ही डेंगू का प्रसार बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि डेंगू बीमारी एडीज मच्छर के काटने से होती है. इसमें मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स तेजी से कम होने लगता है. प्लेटलेट्स बेहद कम हो जाने से मरीज की मौत भी हो जाती है. डेंगू के मामले मानसून के शूरू होने के बाद से ही सामने आने लगता है. सीएस ने कहा कि डेंगू का लार्वा 7 दिन या उससे अधिक दिन ठहरे साफ पानी में ही पनपता है. ऐसी स्थिति में लापरवाही बरतने पर डेंगू फैलने की आशंका बढ़ जाती है.दिन में सोते समय भी करें मच्छरदानी का उपयोगजिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ डीएस सिंह ने कहा कि लोगों को दिन में भी सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके साथ-साथ मच्छर भगाने वाली क्रीम या दवा का प्रयोग दिन में भी करना चाहिए. पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें. घर के सभी कमरों को साफ- सुथरा रखें. टूटे-फूटे बर्तनों, कूलर, एसी एवं फ्रीज में पानी जमा नहीं होने दें. पानी टंकी और घर के आसपास अन्य जगहों पर भी पानी नहीं जमने दें. घर के आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखें और कीटनाशक दवा का इस्तेमाल करें. गमला, फूलदान का पानी हर दूसरे दिन बदल दें. घर के साथ-साथ सार्वजनिक स्थलों पर सतर्कता जरूरी है. मॉल व दुकान चलाने वाले लोग भी खाली जगहों पर रखे डिब्बे और कार्टनों में पानी जमा नहीं होने दें. जमे हुए पानी पर मिट्टी का तेल डालें.
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