मिथिला चित्रकला संस्थान में ‘बैचलर इन मिथिला फोक पेंटिंग’ के नए सत्र का शुभारंभ

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कार्यक्रम में पद्मश्री, साहित्य व कला क्षेत्र से जुड़े विद्वान व अधिकारी

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मधुबनी के सौरठ स्थित मिथिला चित्रकला संस्थान में 'बैचलर इन मिथिला फोक पेंटिंग' का नया सत्र शुरू हो गया है. इस अवसर पर प्रतिष्ठित विद्वानों और कलाकारों ने नए विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया. संस्थान का लक्ष्य इसे भारत का सेंटर ऑफ एक्सलेंस बनाना है.

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Mithila Chitra Kala Sansthan: मधुबनी के सौरठ स्थित मिथिला चित्रकला संस्थान में ‘बैचलर इन मिथिला फोक पेंटिंग’ के नए सत्र का भव्य शुभारंभ किया गया है. इस विशेष अवसर पर कला, साहित्य, इतिहास और संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिष्ठित विद्वानों, कलाकारों और शिक्षाविदों ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को मिथिला की समृद्ध पारंपरिक कला से जोड़ना और उसके विकास की दिशा में आगे बढ़ाना है.

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Madhubani Painting: संस्थान को सेंटर ऑफ एक्सलेंस बनाने का संकल्प

संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान के भविष्य के विजन को साझा किया. उन्होंने कहा कि उनका सपना मिथिला चित्रकला संस्थान को पूरे भारत के कला-जगत का सेंटर ऑफ एक्सलेंस बनाना है. इस लक्ष्य को पाने के लिए सभी शिक्षक और कर्मी कठोर परिश्रम कर रहे हैं और छात्रों से भी अपनी प्रतिभा का सर्वोच्च योगदान देने की अपील की गई.

कला में नवीनता के साथ सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव जरूरी

साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता अजीत आजाद ने विद्यार्थियों को वैश्विक विषयों पर ध्यान देने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि कला की कृति में नयापन होना आवश्यक है, लेकिन इस नवीनता के साथ अपनी कला के मूल्यों और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव भी बना रहना चाहिए. इतिहासकार नरेंद्र नारायण सिंह ‘निराला’ ने कला के संरक्षण के साथ उसमें नए विषयों के समावेश पर जोर दिया.

पद्मश्री कलाकारों ने साझा किए अपने संघर्ष और अनुभव

समारोह में वरिष्ठ आचार्य एवं पद्मश्री बौआ देवी ने नए विद्यार्थियों को आशीर्वाद दिया. वहीं, पद्मश्री दुलारी देवी और शिवन पासवान ने अपने जीवन के कड़े संघर्षों और कला-यात्रा के अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए. कनिया आचार्य-सह-डिग्री कोर्स कोऑर्डिनेटर प्रतीक प्रभाकर ने विद्यार्थियों से निरंतर अभ्यास, अध्ययन और प्रयोग करते हुए अपनी स्वतंत्र कलाभाषा विकसित करने का आह्वान किया.

विद्यार्थियों के बौद्धिक और कलात्मक विकास पर दिया जोर

उपनिदेशक नीतीश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि केवल चित्र बनाने से कोई कलाकार नहीं बनता. अपनी कला की विषय-वस्तु को समझने के लिए इतिहास, साहित्य, नाटक और लोकजीवन का अध्ययन करना भी बेहद आवश्यक है. इस नए सत्र के आरंभ से छात्रों के लिए कला-साधना का एक नया मार्ग प्रशस्त हुआ है.

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