Madhubani News : पितृ पक्ष के अंतिम दिन महालया व कुश त्याग आज

सर्व पितृ अमावस्या रविवार को है. इसी दिन अमावस भी है. नवरात्र व पितृपक्ष की संधि काल को महालया कहा जाता है.
मधुबनी. सर्व पितृ अमावस्या रविवार को है. इसी दिन अमावस भी है. नवरात्र व पितृपक्ष की संधि काल को महालया कहा जाता है. इस समय मां दुर्गा के घर आगमन के लिए वंदना की जाती है और पितरों को जल देकर नमन कर विनती की जाती है कि आप अपने लोक में प्रसन्न रहें और अपने परिजनों पर कृपा दृष्टि बनाए रखें. स्टेशन चौक स्थित हनुमान प्रेम मंदिर के पुजारी पंकज झा शास्त्री ने कहा महालया का महत्व सदियों से भारतीय संस्कृति में रहा है. लेकिन बंगाल में इसका खास महत्व है. महालया या पितृ विसर्जन अमावस्या को पितृ पक्ष में सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है. इस दिन सभी पितरों को याद कर उनका श्राद्ध कर्म किया जाता है. जिसे हम भूल गए या वे अज्ञात हैं. महालया के दिन दुर्गा मां के आगमन से पहले उनकी मूर्ति को अंतिम इसी दिन दिया जाता है. इस दिन मां दुर्गा के पंडाल एवं माता की प्रतिमा को सजाया जाता है. महालया हिंदू परंपराओं में गहराई से निहित है, और इसका सार धार्मिक सीमाओं से परे है. यह विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को एकजुट करता है. सांप्रदायिक सद्भाव और आध्यात्मिक संबंध की भावना को बढ़ावा देता है. महालया की भावना सांस्कृतिक समृद्धि और धार्मिक सहिष्णुता का एक प्रमाण है, जो भारत की एकता को परिभाषित करता है. महालया यानि पितृ पक्ष के अंतिम दिन लोग अपने दिवंगत पूर्वजों से श्रद्धा विश्वास के साथ प्रार्थना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त कर कुश त्याग करते हैं.
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