मधुबनी.
मधुबनी में लगातार जीविका दीदी अपने कदमों को आगे बढ़ा रहीं हैं. समूह की दीदियां अपनी जीविका चलाने के साथ मानवता व पर्यावरण की रक्षा में भी मॉडल बन रहीं हैं. अब दीदी की नर्सरी जिले के क्षेत्रों में हरियाली लाएगी. घर के दहलीज के अंदर रहने वाली महिलाएं अब जीविका से जुड़कर कई क्षेत्रों में महारथ हासिल करने के बाद अब स्वरोजगार के साथ हरियाली को भी बढ़ावा देने में जुट गयी है. मधुबनी में जीविका दीदी द्वारा नर्सरी खोला गया है. इसके लिए बिहार सरकार के वन विभाग से जीविका दीदी को नर्सरी संचालित करने के लिए अनुदान दिया है. जिसमें मोहगनी, बेल, आंवला, अमरूद, आम, सागवान, एमसोल, जामुन, लीची, कटहल आदि के पौधे की तैयारी की जा रही है. दीदी की एक नर्सरी में 20 हजार पौधे को तैयारी करने का लक्ष्य रखा गया है. दीदी के नर्सरी से तैयार पौधों को वन विभाग व मनरेगा योजना के द्वारा 20 रुपये प्रति पौधा की दर से खरीदारी की जाएगी. जिससे दीदी के समृद्धि के द्वार खुलेंगे. साथ ही स्वरोजगार के अवसर मिलने के साथ ही हरियाली आच्छादन कार्यक्रम को सफलता भी मिलेगी.वन विभाग एवं मनरेगा किया गया है एग्रीमेंट
दीदियों के नर्सरी में तैयार पौधे उनसे वन विभाग एवं मनरेगा द्वारा खरीदारी किए जाने का एग्रीमेंट है. इसके लिए जीविका दीदी को हर संभव मदद भी किया जा रहा है. जिले में जीविका दीदी द्वारा 27 नर्सरी में पौधा तैयार किया जा रहा है. इनमें से 12 नर्सरी का पौधा वन विभाग खरीद करेगी. 15 नर्सरी का पौधा मनरेगा द्वारा खरीदा जाएगा. विभिन्न योजनाओं के तहत सरकार द्वारा जीविका दीदियों के पौधों को खरीद करेगी. इस तरह उन्हें स्वरोजगार का अवसर भी मिल रहा है.
नर्सरी के लिए हैं शर्तें
नर्सरी लगाने के लिए चयनित अभ्यर्थी के पास कम से कम आधा एकड़ जमीन होनी चाहिए. यह जमीन गांव के अंदर भी हो सकती है, लेकिन उस भूखंड का जुड़ाव किसी न किसी प्रकार से सड़क से हो. ताकि वहां पौधों की ढुलाई एवं आपूर्ति में कोई कठिनाई नहीं हो. मनरेगा में 20 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से खरीद होती है. इस हिसाब से बिक्री के बाद अन्य सभी खर्चों को काटने के बाद यह आय संभावित है. अभी मधुबनी में 27 नर्सरी चल रही हैं. जीविका दीदी ही यह नर्सरी चला रही हैं. सभी जगह पौधे तैयार किए जा रहे हैं. विभाग के अनुमान के मुताबिक नर्सरियों से एक दीदी को एक लाख से अधिक की सालाना आय संभावित है.
सात से 10 लोगों को मिल रहा रोजगार
ग्रामीण विकास विभाग का प्रयास है कि दीदियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाए. इसीलिए सरकार यह गारंटी ले रही है कि उनकी पौधशाला से कम से कम 20 हजार पौधों की खरीद हो जाए. गरीबी दूर करने का एक माध्यम दीदी की नर्सरी होगी. दीदी की नर्सरी में सात से 10 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है. इससे महिलाओं की आय लगातार बढ़ रही है. उन्हें प्रशिक्षित कर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है और उनके पौधों की खरीदारी की भी व्यवस्था की गई है.क्या कहते हैं अधिकारी
जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक मो़ वसीम अंसारी ने कहा कि जीविका दीदी मानवता व पर्यावरण की रक्षा मे भी मॉडल बन रहीं हैं. मधुबनी में जीविका दीदी के द्वारा 27 नर्सरी खोला गया है. प्रत्येक नर्सरी से दीदी को एक लाख रुपये तक सालाना आय संभावित है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

