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संसाधन के अभाव में जिले के प्लस टू हाई स्कूलों में कैसे होगी इंटर की पढ़ाई

Updated at : 05 Apr 2024 10:33 PM (IST)
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संसाधन के अभाव में जिले के प्लस टू हाई स्कूलों में कैसे होगी इंटर की पढ़ाई

संसाधन के अभाव में जिले के प्लस टू हाई स्कूलों में इंटरमीडिएट की पढ़ाई शुरू करना शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती है. जिले के 400 प्लस टू हाई स्कूलों में से 50 फीसदी स्कूलों में कमरे की कमी है.

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मधुबनी. संसाधन के अभाव में जिले के प्लस टू हाई स्कूलों में इंटरमीडिएट की पढ़ाई शुरू करना शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती है. विदित हो कि जिले के 400 प्लस टू हाई स्कूलों में से 50 फीसदी स्कूलों में कमरे का की कमी है. जिसके कारण इंटरमीडिएट की कक्षाओं का नियमित संचालन करने में स्कूल प्रबंधन को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा. जिले के 200 से अधिक मध्य विद्यालयों को उत्क्रमित कर प्लस टू हाईस्कूल का दर्जा दे दिया गया. लेकिन अभी तक ये सभी उत्क्रमित प्लस टू हाईस्कूल मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. यहां न तो प्रयोगशाला है और न ही पुस्तकालय की सुविधा उपलब्ध है. ऐसे में इन स्कूलों में नये सत्र में इंटरमीडिएट के छात्रों को कैसे मिलेगी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा. यह यक्ष प्रश्न बनकर छात्रों व उनके अभिभावकों के लिए परेशान कर रही है. छात्रों की संख्या के अनुरूप नहीं है कमरा नये सत्र 2024-25 में इंटरमीडिएट की 11वीं कक्षा में तकरीबन 40 हजार छात्र-छात्राओं का जिले के प्लस टू हाईस्कूल में नामांकन होना है. लेकिन जिले के आधे से अधिक प्लस टू हाई स्कूलों में न तो जरूरत के अनुसार भवन व कमरा है और न ही बैठने के लिए बेंच-डेस्क. दर्जनों प्लस टू स्कूलों में विषय बार शिक्षक भी नहीं है. जिसके कारण इंटरमीडिएट की कक्षाओं का वर्ग संचालन करना चुनौती होगी. नहीं है प्रयोगशाला व पुस्तकालय की सुविधा जिले के अधिकतर प्लस टू हाइस्कूलों में न तो सुव्यवस्थित पुस्तकालय है और न ही प्रयोगशाला. ऐसे में इंटरमीडिएट की प्रायोगिक कक्षाओं का संचालन एक बड़ी समस्या खड़ी सकती है. यही हाल पुस्तकालयों का भी है. सुव्यवस्थित पुस्तकालय नहीं रहने के कारण छात्र-छात्राओं को यहां से पुस्तक लेना आसान नहीं होगा. जिससे शिक्षा के स्तर प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है. जिला शिक्षा पदाधिकारी जावेद आलम ने कहा है कि विभागीय निर्णय के अनुसार नये शैक्षणिक सत्र 2024-25 से जिले के प्लस टू हाई स्कूलों में 11वीं कक्षा की पढ़ाई शुरू होगी. जिस विद्यालय में संसाधन की कमी है वहां सुधार के लिए जरूरी उपाय किये जाएंगे. ताकि छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके.

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