सकरी: सरिसब पाही में गुरु पूर्णिमा पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित, महंत शंकर दास महाराज ने बताया गुरु का महत्व

प्रवचन करते महंत शंकर दास महाराज | Prabhat Khabar Network
पंडौल के सरिसब पाही में गुरु पूर्णिमा पर विशेष कार्यक्रम आयोजित। महंत शंकर दास महाराज ने गुरु के महत्व पर प्रकाश डाला और शिष्यों को दीक्षा दी।
Sakri Guru Purnima: पंडौल प्रखंड क्षेत्र स्थित प्राथमिक संस्कृत विद्यालय सरिसब पाही परिसर में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महंत शंकर दास महाराज ने कहा कि सनातन सहित सभी संप्रदायों के लोग गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं.
वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास का योगदान
महंत शंकर दास महाराज ने महर्षि वेदव्यास के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा:
- पराशर मुनि के पुत्र महर्षि वेदव्यास ने न केवल वेदों की रचना की, बल्कि उन्हें चार अलग-अलग भागों में विभाजित भी किया.
- सतयुग में मनुष्य की आयु 1 लाख वर्ष, त्रेता में 10 हजार, द्वापर में 1 हजार और कलयुग में 100 वर्ष हो गई.
- आयु कम होने के कारण ही महर्षि व्यास ने ग्रंथों को बांटा ताकि कलयुग का मनुष्य कम से कम एक भाग पढ़कर भी सद्गति प्राप्त कर सके.
'गुरु बिनु होई न ज्ञान' और सांस्कृतिक संध्या
महाराज श्री ने कहा कि रामायण में भी स्पष्ट उल्लेख है-'गुरु बिनु होई न ज्ञान'. स्वयं भगवान को भी इस धरती पर गुरु की आवश्यकता पड़ी थी. जीवन रूपी भवसागर को पार करने के लिए गुरु की कृपा अनिवार्य है.
कार्यक्रम के दौरान कई प्रमुख गतिविधियां हुईं:
- गायक दिनेश कुमार दिवाकर और संजय कुमार दास ने अपने सुमधुर भजनों और गीतों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया.
- दूर-दराज से आए सैकड़ों शिष्यों ने गुरु दर्शन कर आशीर्वाद लिया तथा दर्जनों नए लोगों ने दीक्षा ग्रहण की.
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By Prabhat Khabar News Desk
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