Madhubani News : बेटियां बन रही हमारी पहचान, शिक्षित करने की करें पहल

Edited by GAJENDRA KUMAR
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"बेटियों के शिक्षा पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन " अंधराठाढ़ी प्रखंड के मैलाम हाट पर किया गया.

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मधुबनी.

बेटियों की शिक्षा के महत्व पर सामाजिक जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट स्टडीज एवं नित्यानंद झा स्कूल ऑफ एजुकेशन बीएड विभाग (संदीप यूनिवर्सिटी, सिजौल) के संयुक्त तत्वावधान में “बेटियों के शिक्षा पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन ” अंधराठाढ़ी प्रखंड के मैलाम हाट पर किया गया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण समुदाय को बेटियों की शिक्षा के महत्व पर एक सार्थक संवाद में संलग्न करना और शिक्षा तक समान पहुंच में लिंग आधारित असमानताओं को समाप्त करने की आवश्यकता को उजागर करना था. इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं मुस्कान शर्मा, आयुषी झा, अक्षय, पूजा, रोबिन्से, बब्लू, सीताराम और नंदनी ने सशक्त अभिनय, भावनात्मक प्रस्तुति और सामाजिक संदेश के माध्यम से दर्शकों का दिल जीत लिया.

वक्ताओं ने कहा कि आज भी हमारे समाज में बेटा बेटी में फर्क किया जाता है. यह कुंठित सोच का परिणाम है. आज बेटियां हर क्षेत्र में बेटों से आगे निकल रही हैं. उनमें परिवार के माध्यम से ही यह सोच देना जरुरी है कि वे हमारे लिये बेटों से किसी भी मायने मे कम नहीं है. यदि हमारा परिवार इस सोच के साथ आगे बढ़ता है तो पूरा समाज आगे बढ़ेगा. कार्यक्रम से लोगों के बीच लैंगिक असमानता जैसे गंभीर समस्या को लेकर व्यापक रुप से ध्यान खींचा गया. वक्ताओं ने कहा कि सबसे जरुरी है कि हम अपनी बेटियों को शिक्षित करें. उन्हें शिक्षित करने के लिये आगे आएं.

प्रो. रिया कुमारी के कुशल समन्वयन में यह प्रदर्शन सांस्कृतिक प्रासंगिकता और विषय की स्पष्टता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. नाटक ने ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों को शिक्षा प्राप्त करने में आने वाली वास्तविक चुनौतियों को दर्शाया और परिवारों व समुदायों को बेटियों की स्कूली शिक्षा को समाज की प्रगति का आधार मानते हुए समर्थन देने के लिए प्रेरित किया. इस दौरान डॉ. रहमुद्दीन मियां, विभागाध्यक्ष एवं डॉ. अनीसा खानम, डीन, स्कूल ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट स्टडीज का मार्गदर्शन मिला. जबकि बीएड विभागगाध्यक्ष डा. बीसी चौधरी, संकायाध्यक्ष ज्योतिंद्र पाठक, आनंद चौधरी, राकेश कुमार सहित अन्य ने भी विचार व्यक्त किया.

यह जनसंपर्क गतिविधि न केवल प्रतिभागी छात्रों के आत्मविश्वास और संवाद कौशल को विकसित करने में सहायक रही, बल्कि गांव के लोगों का ध्यान शिक्षा में लैंगिक असमानता जैसी गंभीर समस्या की ओर भी आकर्षित करने में सफल रही. स्थानीय समुदाय ने छात्रों के प्रयासों की सराहना की और उनके समर्पण की प्रशंसा की. इस प्रकार की सामाजिक रूप से प्रेरित पहलों के माध्यम से संदीप यूनिवर्सिटी शिक्षा की गुणवत्ता, नैतिक जिम्मेदारी और जमीनी सामाजिक परिवर्तन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर सुदृढ़ कर रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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