सीएमआर आपूर्ति के बाद भी 59 करोड़ रुपये का भुगतान अटका, पैक्स अध्यक्षों के सामने वित्तीय संकट

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जानकारी देते कॉपरेटिव बैंक के अध्यक्ष रमन सिंह

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मधुबनी जिले की 249 प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) और 9 व्यापार मंडलों का बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम (BSFC) पर लगभग 59 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है. इस देरी से सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति चरमरा गई है, जिससे किसानों को भी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.

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Madhubani News: मधुबनी जिले में धान अधिप्राप्ति के बदले बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम (BSFC) के पास जिले की 249 प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) और 9 व्यापार मंडलों का लगभग 59 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित पड़ा है. भुगतान में हो रही इस देरी के कारण जिले की सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है.

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को-ऑपरेटिव बैंक अध्यक्ष ने जिला प्रबंधक को लिखा पत्र

सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष रमन कुमार सिंह ने इस संबंध में राज्य खाद्य निगम के जिला प्रबंधक को पत्र भेजकर बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करने का अनुरोध किया है. उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि पैक्सों और व्यापार मंडलों ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर किसानों से धान की खरीद कर सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) की आपूर्ति बीएसएफसी को पूरी तरह कर दी थी. इसके बावजूद देय राशि का भुगतान अब तक लटका हुआ है.

क्रेडिट लोन और ब्याज के बोझ से दब रहे पैक्स अध्यक्ष

अध्यक्ष रमन कुमार सिंह ने बताया कि अधिकांश पैक्सों ने किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए बैंक से क्रेडिट (CC) लोन लिया था. सीएमआर की बकाया राशि न मिलने के कारण वे समय पर बैंक ऋण वापस नहीं कर पा रहे हैं. इससे न केवल पैक्सों पर भारी आर्थिक संकट गहरा रहा है, बल्कि उनकी कार्यशील पूंजी और बाजार में साख भी प्रभावित हो रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पैक्सों को सीसी के एवज में अतिरिक्त ब्याज (सूद) देना पड़ा, तो आगामी वर्ष से पैक्स अध्यक्ष धान खरीद में रुचि नहीं लेंगे, जिसका सीधा नुकसान आम किसानों को उठाना पड़ेगा.

61 हजार एमटी से अधिक चावल जमा, 1.75 अरब का ही मिला भुगतान

आंकड़ों की जानकारी देते हुए बैंक अध्यक्ष ने बताया कि पैक्स और व्यापार मंडल अध्यक्षों द्वारा राज्य खाद्य निगम को कुल 61,039.17 मीट्रिक टन चावल उपलब्ध कराया जा चुका है. इसके बदले राज्य खाद्य निगम ने अब तक 1 अरब 75 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है. शेष 59 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अभी भी बकाया है. उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए बकाया सीएमआर की तिथि को 15 अगस्त तक बढ़ाने का भी अनुरोध किया है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आगामी अधिप्राप्ति पर पड़ेगा बुरा असर

रमन कुमार सिंह ने राज्य खाद्य निगम से मांग की है कि इस संवेदनशील मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बकाया राशि का अविलंब भुगतान सुनिश्चित किया जाए. यदि समय रहते भुगतान नहीं हुआ, तो आगामी धान अधिप्राप्ति व्यवस्था और संपूर्ण ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. साथ ही सहकारी व्यवस्था के प्रति किसानों का भरोसा भी डगमगा सकता है.

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