165 विद्यालयों का अपना भवन नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Jan 2015 7:43 AM (IST)
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मधुबनी : शिक्षा विभाग की लापरवाही का खामियाजा छोटे-छोटे छात्रों को उठाना पड़ रहा है. विद्यालय में समुचित भवन व सुविधा नहीं रहने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है. कई विद्यालय को देख कर यह लगता ही नहीं है कि ऐसा भी विद्यालय हो सकता है. जिले में ऐसे एक नहीं 165 विद्यालय […]
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मधुबनी : शिक्षा विभाग की लापरवाही का खामियाजा छोटे-छोटे छात्रों को उठाना पड़ रहा है. विद्यालय में समुचित भवन व सुविधा नहीं रहने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
कई विद्यालय को देख कर यह लगता ही नहीं है कि ऐसा भी विद्यालय हो सकता है. जिले में ऐसे एक नहीं 165 विद्यालय हैं, जिनके पास अपना भवन नहीं है.
दरअसल, वर्ष 2005-06 में सरकार ने भवन निर्माण के लिए उपलब्ध करायी थी. करोड़ों रुपये जिला में खर्च नहीं हो सके. वर्ष 2005-06 में जिले के विभिन्न विद्यालय में नौ हजार वर्ग कक्षा का निर्माण कराना था, लेकिन इस राशि से सात हजार वर्ग कक्षा का निर्माण कराया गया. अब तक दो हजार भवन का निर्माण नहीं हो सका. इस कारण न सिर्फ कई विद्यालय अब तक भवन विहीन है.
बल्कि सरकार ने नौ साल तक राशि भेजना ही बंद कर दिया था. चालू वित्तीय वर्ष में विद्यालय में भवन निर्माण के लिए राशि उपलब्ध करायी है. इस राशि को भी समय पर खर्च नहीं किया जा रहा है.
एक कमरे में होती है पांच कक्षाओं की पढ़ाई
समय से भवन निर्माण नहीं होने के कारण स्कूलों में कमरों के अभाव में पढ़ाई बाधित हो रही है. प्राइमरी मिडिल स्कूलों में कुछ जगहों पर जहां एक ही कमरे में पांच कक्षा की पढ़ाई हो रही है. वहीं कहीं दो तीन कमरों में ही मिडिल स्कूल का संचालन हो रहा है. शहर के प्राथमिक विद्यालय सूरतगंज में जहां एक ही कमरे में पांच कक्षाओं की पढ़ाई हो रही है वहीं महाराजगंज मुहल्ले में दो तीन कमरों में ही मिडिल स्कूल चल रहा है. शहर के आरके कॉलेज गेट पर अवस्थित मिडिल स्कूल सप्ता में चार कमरों में ही आठ कक्षाओं की संचालन हो रहा है. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की हालत भी बदतर है.
बंद कर दी गयी राशि
नौ साल पूर्व करोड़ों रुपये राशि देने के बाद भी वर्ग कक्ष का निर्माण नहीं होने के कारण सरकार ने विभाग को राशि देना बंद कर दिया और वर्ग कक्ष निर्माण की कवायद शुरू की गई. पर अब तक निर्माण कार्य पूरा नहीं होने पर राशि वापसी का निर्णय लिया गया. राशि वापसी का सिलसिला जारी है. लगभग 20 करोड़ की राशि की वसूली भी कर ली गयी है.
नहीं बन पाया क्लास रूम
पिछले नौ साल में भी जिले में दो हजार वर्ग कक्ष का निर्माण अधूरा है. बार-बार हेडमास्टरों और विद्यालय शिक्षा समिति को निर्माण कार्य पूरा करने को कहा गया, लेकिन अभी तक वर्ग कक्ष नहीं बन पाया है. इसके कारण छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. तंग आकर विभाग ने अब इन वर्ग कक्षों के निर्माण के लिए दी गयी. राशि को वापस करने का आदेश जारी कर दिया गया है. डीपीओ सर्वशिक्षा अभियान ने कहा हैं कि राशि से वर्ग कक्ष का नहीं बनाया जाना अस्थायी गबन है. उन्होंने ब्याज सहित राशि लौटाने का आदेश दिया है.
ड्राफ्ट के माध्यम से राशि लौटायी जायेगी. समय से निर्माण नहीं कराने को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराये जाने का भी आदेश दिया गया है. सभी प्रखंड शिक्षा अधिकारियों को डीएम ने सूची उपलब्ध कराते हुए राशि वापस लौटाने के लिए प्रक्रिया शुरू करने का भी आदेश दिया है. कुछ जगहों पर किचेन शेड का निर्माण नहीं हो सका है तो कुछ स्कूलों में हेडमास्टर कक्ष का निर्माण नहीं हो सका है.
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