प्रेमचंद्र की पुण्यतिथि पर एकल पाठ

Published at :10 Oct 2014 2:48 AM (IST)
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प्रेमचंद्र की पुण्यतिथि पर एकल पाठ

मुंशी प्रेमचंद्र की पुण्यतिथि के अवसर पर गुरुवार को जानकी भवन गौशाला मोहल्ला में मैथिली लेखक संघ के तत्वावधान में मैथिली भाषा में एकल लघु कथापाठ का आयोजन हुआ. गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार मोहन यादव ने की. वहीं, संचालन करते हुए अजीत आजाद ने कहा कि लघु कथा छोटे स्वरूप में बड़ी बात कहने […]

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मुंशी प्रेमचंद्र की पुण्यतिथि के अवसर पर गुरुवार को जानकी भवन गौशाला मोहल्ला में मैथिली लेखक संघ के तत्वावधान में मैथिली भाषा में एकल लघु कथापाठ का आयोजन हुआ. गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार मोहन यादव ने की. वहीं, संचालन करते हुए अजीत आजाद ने कहा कि लघु कथा छोटे स्वरूप में बड़ी बात कहने की क्षमता रखता है.

युवा साहित्यकार अनमोल झा ने एकल पाठ में की शुरुआत में कथा रचना प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कीर्ति, पुनित काका, निक दिन, इज्जत, इज्जत द्वितीय, बदलैत लोक, टेक्नोलॉजी, युद्ध शीर्षक लघु कथा का पाठ किया. पठित कथा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डॉ जगन्नाथ झा ने लघु कथा को साहित्य की एक प्राचीन विद्या बतायी. उन्होंने कहा कि संस्कृत में पंचतंत्र की कथा लघु कथा ही है. जो संक्षिप्त स्वरूप में विस्तृत संदेश देती है. ऋषि वरिष्ठ ने कहा कि लघु कथा उस पटाखे की तरह होनी चाहिए, जिसमें आग लगाने के तुरंत बाद ही जबरदस्त विस्फोट होता है. डॉ दमन कुमार झा ने लघु कथा के स्वरूप की विस्तारपूर्वक चर्चा की. रामेश्वर पांडेय निशांत गोष्ठी में पठित लघु कथा की मुक्त कंठ से प्रशंसा की. गोष्ठी में विचार व्यक्त करने वालों में डॉ उमा कांत दिलीप कुमार झा, मोहन कुमार, गोचल झा, अभिषेक, सतीश साजन, फनींद्र मोहन, इंद्र नाथ, इंद्र कांत, विनय विश्वबंधु सहित कई लोग मौजूद थे.

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