भीखो मांग क छठी मैया के अरग त देबे करब

मधुबनी : छठ लोक आस्था का पर्व है. लोग किसी भी जगह हों, किसी भी परिस्थिति में हों, लेकिन छठ मनाने को तत्पर रहते हैं. इस महान पर्व के प्रति आस्था की मिसाल झंझारपुर का ओझौल गांव भी है. इस गांव को इस साल आयी बाढ़ ने तबाह कर दिया. लोगों के पास रहने को […]
मधुबनी : छठ लोक आस्था का पर्व है. लोग किसी भी जगह हों, किसी भी परिस्थिति में हों, लेकिन छठ मनाने को तत्पर रहते हैं. इस महान पर्व के प्रति आस्था की मिसाल झंझारपुर का ओझौल गांव भी है. इस गांव को इस साल आयी बाढ़ ने तबाह कर दिया. लोगों के पास रहने को न तो घर है, न पहनने को ढंग के चार कपड़े. लेकिन, वे इस मुश्किल हालात में भी छठ पर्व की तैयारी में जुटे हैं. गांव की महिलाएं कहती हैं- ‘जे पाबैन हमर पुरखा सब करैत एलखिन तकरा हम कोना छोईर देबै. भीखो मांगय पड़त त मांगब, मैया के अर्घ्य त देबे करबनि.’
पूजा के लिए चावल लाया मांग कर . गांव के घूरन पंडित के घर भी छठ पूजा होती है.बताते हैं कि उनका पुत्र बहुत बीमार हो गया था तो छठ पूजा में ही ठीक होने पर पूजा करने की मन्नत मांगी थी. इस साल बाढ़ में उनका घर भी बह गया. कुछ भी नहीं बचा है. हालात ऐसी है कि किसी-किसी से मांग कर पूजा की सामग्री जुटा रहे हैं. गांव के ही सोमन पंडित के घर पर उनके किसी रिश्तेदार ने चावल भेज दिया था. इस बात का पता घूरन पंडित को हुआ तो वह सोमन पंडित के घर से आधा किलो चावल मांग कर ले आया. इसी से पूजा की रस्म पूरी की जायेगी.
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